कार्बनिक रसायन
*कार्बनिक रसायन – आधुनिक आवर्त सारणी के वर्ग 14 का प्रथम तत्व कार्बनिक है | कार्बन का परमाणु क्रमांक 6 है , परमाणु भार 12 है |कार्बन के नाभिक मे 6 प्रोटॉन है | कार्बनिक रसायन के अंतर्गत कार्बन एवं उससे बने योगिकों का अध्ययन किया जाता है |
*कार्बनिक योगिक – यूरिया (NH2CONH2)प्रथम मानव निर्मित कार्बन योगिक 1773.
*सर्वभोमिक तत्व – पृथ्वी के समास्त पदार्थों मे कार्बन समान रूप से विधमान है सभी जैव योगिक का अनिवार्य मूल कार्बन तत्व है | मानव शरीर मे ऑक्सीजन तत्व के बाद द्वितीय तत्व रूप मे 15-18% के रूप मे कार्बन उपस्थित रहता है |
*समस्थानिक – कार्बन के समस्थानिक प्रकृति मे पाए जाते है जो अग्रलिखित है | c12, c13, c14 कार्बन रेडियोधर्मी है |
*अपरूप – हीरा और ग्रेफाइट कार्बन के दो अपरूप है, जो सदियो से ज्ञात है फुलेरिन कार्बन का तीसरा नवीनतम अपरूप है , जिसे 1985 मे खोज गया| अपरूप का रसायनिक गुण समान किन्तु भौतिक गुण आसमान रहता है |
*सरंचनात्मक अपरूप – हीरा- कार्बन का सबसे शुध्द क्रिस्टलीय अपरूप है विशेष रूप से त्रियामी चतुष्फलकीय व्यवस्था के कारण अब तक ज्ञात पदार्थों मे हीरा सबसे कठोर आधातु तत्व है| हीरा एवं प्रकाशीय तन्तु पूर्ण आंतरिक प्रवर्तन के सिध्दांत पर कार्यरत है| अत्यंत कठोर होने के कारण काला हीरे का प्रयोग चटानो को (शैल बेधन हेतु ) हेतु किया जाता है |
*ग्रेफाइट – ग्रेफाइट शब्द ग्रीक शब्द ग्रोफो से लिया गया है जो अर्थ षट्कोण फलनीय सरंचना होती है | एक मात्र आधातु के रूप कार्बन का सर्वधिक स्थाई अपरूप ग्रेफाइट विधुत का सुचालक होते है , अतः इसका उपयोग इलेक्टरद निर्माण मे किया जाता है | पेंसिल मे लगा ग्रेफाइट ग्रेफिन की परतों का महज एक ढेर है | ग्रेफिन कार्बन का द्विआयामी अपरूप है | ग्रेफिन शब्द प्रस्तावित किया गया था |
*फुलेरिन – कार्बन का तीसरा नवीनतम एवं वर्तमान ज्ञात अपरूप है | रिचर्ड बकमिस्टर फुलर के नाम पर इसे फुलेरिन कहते है | फुलेरिन एक गोलीय सरंचना है, जिसका निर्माण कार्बन षट्कोण एवं पंचकुरण से हुआ है |
- कोक – कोयले को वायु की अनुपस्थित मे उच्च ताप पर गर्म कर इसे प्राप्त किया जाता है | इस प्रक्रिया द्वारा वाष्पशील अवयव कोक मे से हट जाते है एवं 80-85% शुध्दतम कार्बन के रूप मे ईंधन प्राप्त होते है | कोक का उपयोग इंजन व्यलर मे भट्टियों मे ईंधन के रूप मे होता है | धातुओ के निष्कशरण मे अयस्क को गर्म कर उससे धातु प्राप्ति होती है इसका प्रयोग किया जाता है |
- चारकोल – ऐसा असारांचना कार्बनिक यौगिक जो कार्बनिक पदार्थों को अर्ध दहन कर प्राप्त किया जाता है | अस्थि चरकोल या जन्तु चारकोल का प्रयोग मुख्य रूप से चीनी के विलयन को साफ करने मे किया जाता है | भूरी सर्करा को विरंजित करने अर्थात शुध्द रूप से परिवर्तित करने के लिए अस्थीय जन्तु चारकोल का प्रयोग किया जाता है | कष्ट चारकोल लकड़ी कोयला |कष्ट चारकोल अक्रिय गैसों को अवशोषित करने मे काम करता है
*काजल – यह महीन काले रंग का चूर्ण होते है |इसे किरोसिन तेल, तरपिन तेल आदि कार्बनयुक्त पदार्थों को जलाकर प्राप्त किया जाता है, काजल मे लगभग 95% कार्बन पाया जाता है तथा इसका प्रयोग जूते पोलिस, प्रिन्ट की स्याही, आँख आदि मे किया जाता है | यह असरंचनात्मक अपरूप है|
*कोयला – ठोस जीवाश्म ईंधन काला सोना /उद्धोगओ की जननी | यह सर्वाधिक प्रयोग किया जाने वाला जीवाश्म ईंधन है | कोयला ब्रिटेन मे जननी ओढ़ोगिक क्रांति का आधार रहा इस कारण इसे उद्धोगओ की जननी या काला सोना |
कार्बन का % के आधार पर
- एनप्रेसईट — 90-95%
- लिग्नाइट —– 75-80%
- बिटुमिनस —- 50-70%
- पीट —- 15-45%
वायु या ऑक्सीजन की उपस्थिति मे कार्बन दो प्रकार के होते है |(ऑक्ससईड बनाते है )
- कार्बन मोनो आक्सइड – सभी वायु प्रदूशकों मे कार्बन मोनो आक्सइड 50% घटक के रूप मे काम, करता है| कार्बन मोनो ऑक्साइड हीमोग्लोबिन से संयोग कर करबोसिहिमोग्लोबिन का निर्माण करता है रक्त मे निर्मित यह स्थाई यौगिक कोशिकाओ मे पहुचकर शरीर का दम घोंट देता है | अनुप्रयोग — c +o2—co2 तथा 2c +o2 – 2co
- कार्बन हाइड्रोआक्ससाइड– ग्रीन उस गैसों द्वारा होने वाली वेशविक तपन मे 55% के साथ द्वितीय स्थान पर है साथ ही क्लोरो फॉलोरो कार्बन 25% मिथेन 15% नाइटर्स ऑक्ससईडे 6% है | जब द्रव co2 को शीघ्रता से ठंड कर दिया जाता है तो यह ठोस मे बदल जाता है जिसे ठोस co2 अथवा शुष्क बर्फ कहा जाता है | कार्बन डाइऑक्ससईड अम्लीय स्वभव की होती है जजों जल मे घुलकर कार्बोनिक अम्ल (h2co3 )बनाती है| c + o 2 —- co2 (संयोजन अभिक्रिया )|
*हाइड्रोकार्बोन — कार्बोन एक सर्वभौमिक तत्व है अर्थत प्रकृति मे पाई जाने वाली आधातु कार्बन सर्वाधिक तत्वों के साथ संयुक्त होकर अपना सर्वाधिक यौगिक निर्माण करता है , जिसका अध्ययन विज्ञान की शाखा कार्बनिक रसायन मे किया जाता है | कार्बन हाइड्रोजन के साथ मिलकर जिन यौगिक का निर्माण करता है हाइड्रोकार्बन कहलाता है|
*संतृप्त हाइड्रोकार्बन –इस श्रेणी के यौगिकों मे कार्बन परमाणु एकल बंध द्वारा जुड़े होते है | इनके अंतर्गत एलकेन श्रेणी के सदस्य आते है| एलकेन -कंसकृया होती है – सूत्र = CN H2 N+2

*मीथेन – यह एलकेन श्रेणी का प्रथम सदस्य है| कोयले खदानों मे विस्फोट का कारण मीथेन एवं ऑक्सीजन है| दलदली भूमि मे (धन के खेत ) का गर्माहट भरा माहौल मिथेन गैस के कारण होता है |मिथेन बायोगैस प्राकृतिक गैस, कंप्रेसड़ नेचुरल गैस एवं पवाएन्ट नेचुरल गैस का प्रमुख घटक है| lpg सिलेंडर और सिगरेट लाइटर मे मुख्य रूप मे ब्यूटेन होती है| ch4 –मिथेन
*असंतृप्त हाइड्रोकार्बन – इस श्रेणी के यौगिकों मे कार्बन परमाणु द्वितीय एवं तृतीय बांधों द्वारा जुड़े होते है,इनके अंर्तगत एलकिन एवं एलकाइन श्रेणी के सदस्य होता है| एलकिन श्रेणी – इस श्रेणी के सदस्यो के मध्य द्विबन्द पाया जाता है|

*एथीन – यह एलकिन श्रेणी का प्रथम सदस्य है| जिसे c2 h4 के नाम से जाना जाता है | वर्तमान समय मे कच्चे फलों को पकाने के लिए एथिलीन (एथीन ) गैस का प्रयोग किया जाता है|
*एलकाइन श्रेणी – इस श्रेणी के सदस्य के मध्य त्रिबंध (c=c )पाया जाता है|

*एथाइन – यह एलकाइन श्रेणी का प्रथम सदस्य है जिसे c2 h2 एथाइन /असीटलीं के नाम से भी जाना जाता है| पुराने समय मे कच्चे फलों को पकाने के लिए एथाइन गैस का उपयोग किया जाता था , परंतु 1955 मे धारा -44 के तहत इस गैस के स्वर फलों के पकाने पर प्रतिबंद लगा दिया गया क्योंकि यह गैस कार्सिनोजन की तरह व्यवहार कर रही थी| गैस वेल्डिंग मे एसीटलीं एवं ऑक्सीजन के मिश्रण का प्रयोग किया जाता है | – एथाइन /असीटलीं – c2 h2
प्रश्न
- कार्बन आवर्त सारणी के किस समूह मे आता है ?
= समूह 14 (आधुनिक आवर्त सारणी )
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