*विलयन – विलयन दो या दो से अधिक पदार्थों का एक मिश्रण है, जिसमे किसी निश्चित ताप पर विलय और विलायक को अपेक्षिका मात्रए एक निश्चित सीमा तक निरंतर परिवर्तित हो सकती है|
*जब विलेय को विलटक मे डाला जाता है और विलेय विलायक मे समान रूप मे वितरित होकर संयंत्र मिश्रण बनाता है,जिसमे विलेय के अनु या अयन विलायक के अयन या अनु मे समान रूप से परिक्षेपित रहते है, तो इस प्रकार बने मिश्रण को परिक्षेपण कहा जाता है|विलायक को परिक्षेपकन माध्यम तथा विलेय को परिक्षेपित पदर्थ कहा जाता है|
*सांद्र और तनु विलयन–ऐसा विलयन जिसमे प्रति इकाई आयतन मे विलेय की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है,वह सांद्र विलयन तथा जिस विलयन मे प्रति इकाई आयतन मे विलेय की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है, वह तनु विलयन कहलाता है|

*परिक्षेपित कर्णो के आकार पर विलयन का प्रकार– किसी विलयन मे परिक्षेपित कणों के आकार पर इन्हे तीन प्रकारों मे बाँटा जा सकता है वास्वातिक कोलाइड एवं निलंबन विलयन|

*वास्तविक विलयन–यह दो या से अधिक पदार्थों का समांग मिश्रण होता है,जिसमे कणों का आकार 10-7 cm से कम होता है| इस विलयन के कण परिक्षेपण मध्यम के साथ इस प्रकार घुल मिल जाते है की दोनों मे विभेदकर पाना अत्यंत कठिन होता है| न ही इन्हे अलग अलग देखा जाता है,साथ ही इनमे प्रकाश का मार्ग भी दिखाई नहीं देता है| यह विलयन सबसे अधिक स्थाई होता है|
Ex – चीनी जल मे विलयन, नामक जल मे विलयन आदि|
*कोलाइड विलयन– यह दो या दो से अधिक पदार्थों का विसंग मिश्रण होता है, जिसमे कणों का आकार 10-5,10-7 cm तक होता है| इस विलयन के कण नग्न आँखों से तो नहीं देखा जा सकता है, लेकिन शूकक्षमदर्शी से देखा जा सकता है| इस प्रभाव को टिंडल प्रभाव कहते है| एक विशेष तकनीक अपकेन्द्रण तकनीक द्वारा परिक्षेपित प्रवस्थाव को परिक्षेपण मध्यम से पृथक किया जा सकता है | ex – दूध , गोंद , रक्त आदि|
- सोल – ऐसा कोलाइड जिसमे ठोस कण द्रव मे परिक्षेपित होते है, उसे सोल कहते है– रबर कोलाइड दस्तानों का निर्माण रबर सोल से किया जाता है\
- जेल–ऐसे कोलाइड जिसमे द्रव कण ठोस मे समान रूप से परिक्षेपित तो होते है लेकिन उन्मे प्रवाहता नहीं होता उसे जेल कहा जाता है|
- एरोसॉल– किसी गैस मे द्रव या ठोस कणों का परिक्षेपण एरोसॉल कहलाता है|– धुंध ,कोहरा , बादल ,धुआ एवं धूल आदि |
- पायस – जब किसी कोलाइड मे एक द्रव के सारे कण दूसरे द्रव के सारे कणों मे परिक्षेपित तो हो जाता है, लेकिन घुलते नहीं है तो इस कोलाइड का पायस कहा जाता है| दूध एक प्राकृतिक पायस है| जबकि पेंट कृत्रिम पायस है| झाग गैस मे परिक्षेपण झाग कहलाता है जो साबुन से उत्पन्न होता है|
*निलंबन – यह दो या अधिक पदार्थों का विषमांग मिश्रण होता है, जिसमे कणों का आकार 10-7 cm या इससे अधिक होता है| इस विलयन के कण विलायक मे अघुलनशील होते है,जिन्हे नग्न आँखों से देखा महि जा सकता है| इस विलयन मे प्रकाश का मार्ग दिखाई देता है| यह विलयन अस्थायी होता है| जिसे साधारण छनन विधि द्वारा निलंबित कणों को अलग अलग किया जाता है|
*बफर विलयन – यह विलयन जो अम्ल या क्षार की साधारण मात्राओ को अपनी प्रभावी अम्लता या क्षारता से प्रयप्त परिवर्तन किए बिना अवशोषित कर लेता है| उसे बफर विलयन कहते है| – सोडियम असीटिकतथा एसीटिक अम्ल का मिश्रण एक प्रभावी बफर विलयन है|
*विलयता को प्रभावित करने वाले करक –
- सामान्यतः ठोस पदार्थों की विलेयता ताप बड़ने से बढ़ती है|
- किसी द्रव मे गैस की विलेट ताप बढ़ने से घटती है|
- दाब बढ़ाने पर द्रव मे गैस की विलेयता बढ़ती है|
*विलेयता – किसी निश्चित ताप एवं दाब पर 100grm विलायक मे घुलनेवाली विलेय की अधिकतम मात्रा को उस विलेय पदार्थों को उस विलायक मे विलेपदा कहते है|

प्रश्न
- विलयन मे विलायक कि मात्रा बढ़ाने से क्या होता है?–घनत्व घटता है|
Response
good