Light (प्रकाश )

*भौतिकी का पिता – न्यूटन *आधुनिक पिता -गलेलियों *वर्तमान पिता – आइंस्टिन

>प्रकाश -प्रकाश एक विधुत चुंबकीय विकिरण है , तकनीक या विज्ञानिक संदर्भ मे किसी भी तरंगदेर्घ्य के विकिरण को प्रकाश कहते है |

(light = एक प्रकार की ऊर्जा =विधुत चुंबकीय तरंग =अनुप्रस्त तरंग =किरणों का पुंज )

प्रकाश के संबंध मे सिद्धांत

1 न्यूटन -प्रकाश का कणिका सिद्धांत

2 हइगेन्स -प्रकाश का तरंग सिद्धांत

3 ग्रेमालड़ी -प्रकाश का विवर्तन सिद्धांत

4 थामसयंग – प्रकाश का व्यतिकरण सिद्धांत

5 फोकल्ट -द्रवों मे प्रकाश की चल साबंधी तरंग सिद्धांत

6 मैक्स पालंक – प्रकाश का क्वांटम सिद्धांत

7 वेक्स वेल – प्रकाश विधुत चुंबकीय तरंग सिद्धांत

8 आइंस्टिन- प्रकाश का विधुत चुंबकीय तरंग (फोटन ) सिद्धांत

9 काप्टन – प्रकाश का कॅप्टन प्रभाव

*विभिन्न माध्यमों मे प्रकाश कीचल

  1. निर्वात – 3* 10^8 m /s 
  2. कांच – 2* 10^8 m/s 
  3. तारपीन तेल – 2.04* 10^ 8 m /s 
  4. जल – 2.25* 10^8 m /s 
  5. रॉक साल्ट – 1.96* 10^8 m /s 
  6. नाइलोन – 1.96* 10^8 m /s 

(निर्वात- 3* 10^8 m /s — द्रव – 2.25* 10^8 m /s —ठोस -1.96* 10^8 m/s) 

*प्रदीप्त पिंड – वह वस्तुए जो स्वय प्रकाश का उतसर्जन  करती है उन वस्तुओ को प्रदीप्त वस्तुए कहते है | – मोमबाती ,सूर्य ,विधुत बल्ब आदि 

*वस्तुए -1. प्रदीप्त – सूर्य ,जुगनू , मोमबाती आदि 

            2. अप्रदीप्त – पृथ्वी , चंद्रमा ,टेबल आदि 

            3. पारदर्शी – जल , शीशा  आदि 

            4. अपारदर्शी – पेड़ ,दीवार आदि 

            5. अर्धपारदर्शी – तेल से भीगा  कागज ,खुरचा हुआ शीशा आदि  

*प्रकाश का परावर्तन –   जब प्रकाश की किरण किसी प्रवर्तक पृष्ट से टकराता है , तो यह उसी माध्यम म पुनः मूड जाता  जाता है जिस माध्यम से आता है | इस परिघटना को प्रकाश प्रवर्तन कहते है |

Example : अपना प्रतिबिंब आईने मे देखना 

             2. पानी की सतह पर आकाश का प्रतिबिंब 

(लेपन -Hg , AgBr , Al , AgNo3 )

*प्रकाश का अपवर्तन – प्रकाश का किरण एक समांगी माध्यम से दूसरे समांगी माध्यम मे तिर्यक रूप से प्रवेस करना तथा अपने पथ से विचलित होने की परिघटना प्रकाश का अपवर्तन कहलाता है|

* प्रकाश का अपवर्तन 

  1. माध्यम –सघन (water ) , विरल (air )
  2. किरण (विरल से सघन )= अभिलम्ब की ओर 
  3. किरण (सघन से विरल )= अभिलम्ब से दूर 

*अपवर्तन का नियम –1. आपतित किरण , अप्रवर्तित किरण और अभिलम्ब तीनों एक ही ताल मे होता है | 2. आपतन कोण को ज्या (sini ) और अपवर्तन कोण की ज्या (sinr ) मे एक निश्चित अनुपात होता है ,जिसे पहले माध्यम के सापेक्ष दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक कहते है |

*दैनिक जीवन मे अपवर्तन का उआदहारण 

  1. तारे और सूर्य वास्तविक उचाई से अधिक उचाई मे दिखते है 
  2. तारे टिमटिमाते हुए प्रतीत होती है 
  3. सीधी छड़ का पानीमे मुड़ा हुआ दिखाई देना 
  4. सूर्य का वास्तविक सूर्योदय से पहले एव वास्तविक सूर्यास्त के बाद भी दिखाई देना आदि 

*प्रिज़म –उस समांगी पारदर्शी माध्यम को प्रिज्म कहते है , जो किसी कोण पर झुके दो समतल पृषठों के बीच घिरा हो तथा प्रत्येक प्रिज्म का गुण होता है की वह किरणों अपने आधार की और मोड देता है |

(1.  तरंगधेेर्य सबसे ज्यादा –लाल ,2. आवर्ती सबसे ज्यादा –बैगनी )

*प्रकाश का प्रकीर्णन –सूर्य से आने वाला प्रकाश जब वायुमंडल मे से होकर गुजरात है तो ,वह मार्ग मे पड़ने वाले अणुओ या छोटे कणों से अंतक्रिया कर बिखर जाता है |इस परिघटना को प्रकाश का प्रकीर्णन कहते है 

*पूर्ण आंतरिक परावर्तन – जब प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम मे प्रवेश करती है और आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण का मान से आधिक होती है ,तो प्रकाश की किरण परावर्तन के नियमों का पालन करती हुई उसी माध्यम मे परावर्तित हो जाती है , जिस माध्यम से वह आई थी यह परिघटना पूर्ण आंतरिक प्रवर्तन कहलाती है 

*क्रांतिक कोण — आपतन कोण का यह मान जिसके लिए अपवर्तन कोण का मान  90 degree है क्रांतिक  कोण कहलाता है |

*प्रकाश का वर्ण विछेपन — जब सूर्य का प्रकाश (स्वेत प्रकाश )प्रिज्म से होकर गुजरता है तो वह अपने अवयवी रंग मे विघटित हो जाती है | प्रकाश की इस प्रकार अपनी अवयवी रंगों मे विघटित  होने की परिघटना को वर्ण विक्षेपण कहलाती है |

परदों पर प्राप्त रंगों की पत्तियों को वर्णक्रम या स्पेक्ट्रम  कहते  है 

                           V I B G Y O R

तरंग धैर्य — न्यूटम                          ज्यादा 

आवृति —ज्यादा                             न्यूनतम 

प्रक्रिनन — ज्यादा                           न्यूटम

 *प्रकाश का प्रक्रिनन — सूर्य से आने वाला प्रकाश जब वायुमंडल मे से होकर गुजरता है ,तो मार्ग मे पड़ने वाला आणुओ के साथ अंत क्रिया कर बिखर जाता है 

*प्रकाश का व्यतिकरण — जब समान आवृति और लगभग आयाम को दो प्रकाश तरंगे किसी माध्यम मे एक साथ एक ही दिशा मे गति करती है ,तो अध्यारोपण के सिध्दांत के अनुसार  परिणामी तरंग का निर्माण करता है 

*प्रकाश का विवर्तन — जब प्रकाश किसी छोटे छिद्र से होकर गुजरता है या उसके मार्ग मे कोई महीन वस्तु (अवरोध ) आ जाती है ,तो प्रकाश किनारे प्र मूड जाती है |

*इंद्रधनुष — वायुमंडल मे स्थित जल के बूंदों द्वारा प्रकाश के अपवर्तन तथा प्रकाश के पूर्ण आंतरिक अपवर्तन केर कारण इंद्रधनुष बनाता है |दोपहर के समय इंद्रधनुष नहीं दिखाई पड़ता है |

*प्राथमिक इंद्रधनुष — 1. दो अपवर्तन तथा एक पूर्ण आंतरिक परवर्तन 

         2सबसे भीतरी चाप बैगनी एवं बाहरी चाप लाल 

        3. अपेक्षा कृत अधिक चमकदार 

         4. ROYGBIV

*द्वितीयक इंद्रधनुष — 1. दो अपवर्तन तथा दो पूर्ण आंतरिक परावर्तन 

                                       2. सबसे भीतरी चाप लाल एवं बाहरी चाप बैगनी 

                                        3. कम चमकदार 

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