तंत्रिका तंत्र – मानव तंत्रिका तंत्र कोशिकाओ , उत्तकों और अंगों का एक जटिल नेटवर्क है जो विभिन्न शारीरिक कार्यों का समन्वय और विनियमन करता है यह शरीर के विभिन्न भागों के बीच संकेतों और संदेशों को प्रसारित करने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है , जिससे निर्बाध संचार और नियंत्रण संयव होता है|
तंत्रिका तंत्र का कार्य – मानव तंत्रिका तंत्र विधुत रसायनिक संकेतों को संचारित करके संचालित होता है| तंत्रिका तंत्र के निर्माण खंड , न्यूरॉन्स , इन संकेतों को संचारित करने और संसाधित करने के लिए जिम्मेदार विशेष कोशिका है | इनमे तीन मुख्य भाग होते है – कोशिका बॉडी , डेंड़राइडस और ऐक्सॉन |
न्यूरॉन संचार –तंत्रिका संकेत एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन तक सिनेपस के मध्यम से प्रेषित होते है |जब एक विधुत आवेग एक ऐक्सॉन के अंत तक पहुचता है, तो न्यूरोट्रासमीटर सिनेपस मे जारी होते है, जो न्यूरॉन के बीच एक छोटा सा अंतराल है| ये न्यूरोट्रासमीटर प्राप्त करने वाले न्यूरॉन के दंडराइटस पर रिसेपटर्स से जुडते है; एक विधुत संकेत शुरू करते है जो संदेश संचरण को जारी रखता है|

न्यूरॉन के प्रकार –मानव तंत्रिका तंत्र के भीतर विभिन्न प्रकार के न्यूरॉन मौजूद होते है|जिनमे से प्रत्येक एक विशिष्ट उद्देश्य को पूरा करता है
- संवेदी न्यूरॉन (sensory nervous )-वे संवेदी अंगों ,जैसे की आंखे और कान से सी एन स तक सूचना संचारित करता है |
- मोटोर न्यूरॉन (motor nervous )-वे सी एन स से मासपेशियों और ग्रंथियों तक संकेतों को रिले करता है , जिससे मोटर प्रतिक्रियाए शुरू होते है|
- इंटरन्यूरोन्स(inter nervous)- ये सी एन स मे संवेदी और मोटर न्यूरॉन को जोड़ते है,जिससे जटिल तंत्रिका मार्ग और प्रसंस्करण सक्षम होते है|
मानव का तंत्रिका तंत्र दो प्रकार के होते है–
- केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र (central nervous system )
- मस्तिष्क और मेरारज्जु (brain &spinal cord )
- परिधीय तंत्रिका तंत्र (p n s )
- दैहिक और स्वयत तंत्रिका तंत्र
- स्वयत तंत्रिका तंत्र -सहानुभूति और परानुकंपी तंत्रिका तंत्र
तंत्रिका तंत्र की सरंचना – मानव तंत्रिका तंत्र मे दो मुख्य घटक होते है-
1.केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र – c n s मस्तिष्क और रीड की हड्डी से बना होता है खोपड़ी के भीतर स्थित मस्तिष्क तंत्रिका तंत्र का नियंत्रण केंद्र है|यह संवेदी जानकारी को संसाधित करता है , मोटर प्रतिक्रियाओ को आरंभ करता है और संज्ञानात्मक कार्यों को नियंत्रित करता है | दूसरी और रीड की हड्डी मस्तिष्क से आने जाने वाले संकेतों के लिए राजमार्ग के रूप मे कार्य करती है |
2.परिधीय तंत्रिका तंत्र (p n s) – p n s मे c n s के बाहर की नसे और गैनगिलाया शामिल है| दैहिक तंत्रिका तंत्र (so metic nervous system )स्वैच्छिक गतिविधियों और संवेदनाओ को नियंत्रित करता है , जिससे हम बाहरी वातावरण के साथ बातचीत कर पाते है| इसमें मोटर न्यूरोन्स होते है जो सी एन स से कंकाल की मस्पेशियों तक सिंगनल संचारित करते है,जिससे हम चल पाते है,बात कर पाते है और रोजमर्रा के काम कर पाते है|
स्वयत तंत्रिका तंत्र ( Autonomic nervous system ) -अनैच्छिक क्रियाओ को नियत्रीत करता है और होमियों स्टेसिस को बनाए रखता है| यह दृश्य गति , पाचन और श्वसन जैसे कार्यों को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार है| स्वयत तंत्रिका तंत्र मे दो विभाग होते है- सहानुभूति और परानुकंपी तंत्रिका त्तंत्र , जो संतुलन बनाए रखने के लिए विपरीत दिशा मे करते है|
सहानुभूति तंत्रिका तंत्र (sympathetic nervous system )- यह तनाव पूर्ण स्थितियों के दौरान शरीर को लड़ने या भागने की प्रतिक्रियाओ के लिए तैयार करता है| यह दृश्य गति को तेज करता है, रक्तचाप बढ़ाता है और मांसपेशियों मे रक्त प्रवाह को मोड़ता है, जिससे त्वरित प्रतिक्रियाए संभव होते है|
परानुकंपी तंत्रिका तंत्र (parasympathetic n . s )-यह विश्राम को बढ़ावा देता है और ऊर्जा का संरक्षण करता है | यह दृश्य गति को धीमा करता है रक्तचाप को कम करता है| पाचन और उत्सर्जन को बढ़ावा देता है|
मानव मस्तिष्क मे कोशिकाए की संख्या –मानव मस्तिष्क मे 100 million स्नायु कोशिकाए पायी जाती है|
- कार्य – मानव मस्तिष्क का कार्य समस्त अंगों पर नियंत्रण रखना होता, अर्थात मानव मस्तिष्क 80 अंगी पर नियंत्रण रखता है|
- रक्षात्मक –मानव मस्तिष्क को कपाल अर्थात क्रेनियम नामक 8 हड्डियों का आवरण सुरक्षा देता है|
- वजन –एक वयस्क व्यक्ति का मस्तिष्क का वजन 1400 ग्राम होता है| अर्थात मानव मस्तिष्क की कपाल गुहा का आयतन 1400 ग्राम होता है|
- वर्तमान मानव –होमोसेपियंस से भी बुध्दिमन मानव से पूर्ववत मानव क्रोमेगणं था जिसके मस्तिष्क का वजन 1650 ग्राम या अर्थात क्रोमेगणं मानव की कपालगुहा का आयतन (1650)से होमोसेपियंस अधिक था|
ग्रन्थि – मानव मस्तिष्क मे दो अंतहस्त्रवि ग्रन्थि पायी जाती है-
- पीयूष ग्रन्थि
- पीनियल ग्रन्थि
पीयूष ग्रन्थि – पिट्यूटरी ग्रन्थि मानव मानव मस्तिष्क की हाइपोलेमस भाग से संबंध होती है,इसलिए इसे हाइयपोलेमस ग्रन्थि के नाम से जाना जाता है|
मानव शरीर की सबसे छोटी ग्रन्थि –पीयूष ग्रन्थि ,पीयूष ग्रन्थि को मानव मस्तिष्क की सबसे छोटी अंत:सत्रवी भी कहा जाता है|
मेनिनजिस – केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र अर्थात मस्तिष्क एवं रीढ़ की हड्डी को सुरक्षा देने के उद्देश्य से इसके चारों तरफ तीन प्रकार की झिल्लियों (membrane) का स्तर /पर्त /आवरण उपस्थित होता है,जो मेनिनजिस कहलाता है|
मेनिनजिस तीन स्तरों का बना होता है –
- ड्यूरामेटर – यह ब्रेन की सबसे मजबोत एवं बहरी पर्त होती है|
- अरेक्नाइड – यह ब्रेन की मध्य पर्त होती है, जिसमे बीच मे कुछ फोल्ड पाये जाती है जिन्हे अरेक्नएड विलाई कहते है|
- पायमेटर – यह ब्रेन की सबसे आंतरिक पर्त होती है|
अग्रामस्तिष्क या सेरीबरम – मानव मस्तिष्क का सबसे बड़ा एवं विकसित भाग सेरीबरम कहलाता है| सरीबरम कारपस के लोसम नामक आधारीय सरंचना पर तिक हुआ यक भाग है|
- शरीरिक नियत्रण केन्द्र द्वारा – यह चेतना, बुद्धिमाता, इच्छाशक्ति, स्मरणशक्ति, अनुभव का केन्द्र होता है|
- देखना / सुनना /बोलना (एच्छिक क्रियाओ का केंद्र होता है|
- अग्रमस्तिष्क या प्रमस्तिष्क शरीर के निम्नलिखित भागों को नियत्रण केंद्रों द्वारा निभत्रित करता है-
- फ्रन्टल लोब – चलना, बोलना एवं दौड़ना जैसी ऐच्छिक क्रियाओ का नियंत्रण केन्द्र यह अनुभव एवं भावनात्मक का केन्द्र भी है|
- पैराइटल लोब – ज्ञान , बुध्दिमता , पड़ना एवं स्वाद केन्द्र |
- टेंपोराल लोब – भाषा समझ , व्यवहार , गंध एवं सुनने का केंद्र |
- ऑक्सीपेटल लोब – देखने का केंद्र |
थेलेमस – मानव मस्तिष्क के थेलेमस भाग से पीनियल नामक एक अंतः सत्रवी ग्रन्थि जुड़ी होती है जो की जन्म के कुछ वर्षों बाद (लगभग )विलुप्त हो जाती है|
शारीरिक नियंत्रण केंद्र – किसी वस्तु के ठंडेपन एवं गर्माहट का केंद्र थेलेमस मे स्थित होता है|चोट लगने पर दर्द का वास्तविक एहसास थेलेमस केन्द्रक मे उपस्थित दर्द के केंद्र के कारण होता है|
हाइपोथेलेमस – मस्तिष्क के हाइपोथेलेमस भाग से पीयूष / पिट्यूटरी नामक एक अंतः सत्रवी ग्रांथी जुड़ी होती है इस कारण इसे हाइपोथेलेमस ग्रांथी कहा जाता है|
शरीरिक नियंत्रण केन्द्र – हाइपोथेलेमस भूक, प्यास, प्यार, घृणा के नियंत्रण का केन्द्र होता है| हाइपोथेलेमस मानव शरीर का ताप नियंत्रण करता है, क्योंकि मानव शरीर का ताप नियंत्रण केन्द्र हाइपोथेलेमस मे स्थित होता है|
बुखार शरीरिक तापमान मे वृद्धि वस्तव मे मस्तिष्क के हाइपोथेलेमस मे स्थित होटरेगुलेटरी सेंटर का अत्यधिक गर्म हो जाना जिसके उपचार फलस्वरूप पेरासीटामोल या एसप्रिन जैसी एन्टिपायरेटिक औषधियों इस भाग के तापमान सामान्य कर देती है|
मध्य मस्तिष्क (mid brain )- मानव मस्तिष्क का एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण हिस्सा है,जो अग्रमस्तिष्क और पश्च मस्तिष्क को जोड़ता है और दृष्टि, श्रवण, नींद-जागने के चक्र, अनैच्छिक क्रियाओ (जैसी पुतली का सिकुड़ना )और सरतकता (reticular activating system के जरिए )को नियंत्रित करने मे मदद करते है|
पश्य मस्तिष्क
अनुमस्तिष्क(cerebellum )-यह शारीरिक संतुलन तथा आंतरिक कर्ण संतुलन का केंद्र होता है| सेरिबेलम मांशपेशियो एवं उनकी हरकतों पर नियंत्रण रखने एवं सर्वथा नई चीजे सीखने मे मदद करता है|
पोंस वेरालाई -यह अग्रमस्तिष्क एवं अनुमस्तिष्क के बीच तंत्रिका कड़ी का काम करता है|
रीढ़ की हड्डी –रीढ़ की हड्डी को मेरारज्जु के नाम से से भी जाना जाता है , कशेरुक दंड के खाली स्थान (न्यूराल ट्यूब)मे रीढ़ की हड्डी धसी होती है| रीढ़ की हड्डी को रक्षात्मक आवरण कशेरुकी दंड प्रदान करता है जो की 26 अस्थियों से मिलकर बना होता है| मेरारज्जु के चारों तरफ तीन झिल्लियों से बना रक्षात्मक आवरण मेनिनजिस पाया जाता है,जिसमे सेरीब्रोसपाइनल द्रव पाया जाता है|रीढ़ की हड्डी द्वारा प्रतिवर्ती क्रियाओ का नियंत्रण केंद्र होता है अर्थात विपरीत परिस्थियों मे शारीरिक संतुलन एसी के स्वर होता है|प्रतिवर्ती क्रियाओ की खोज (मार्शल हॉल )ने की थी |
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