प्रजनन तंत्र -(1)जनन या प्रजनन -अपनी जाती को निरन्तरता बनाए रखने के लिया जीव की जनन प्रक्रिया द्वारा अपने ही समान संतान उत्पन्न करने का गुन प्रजनन कहलाता है |
(2)प्रजनन तंत्र – संतनोत्पति के लिया उतारदायी अंगों के तंत्र को जनन तंत्र कहते हैं | नर जनन तंत्र 17 जनन अंगों से मिल कर बना होता है एवं मद जनन तंत्र 16 जनन अंगों से मिल कर बना होता है |
- प्रमुख नर जनन अंग – पुरुषों मे प्रमुख नर जनन अंग के रूप मे एक जोड़ी वृषण पाए जाते हैं | जिसमे नर युग्मक शुक्राणु का निर्माण होता है |
- प्रमुख मद जनन अंग – महिलाओं मे मद जनन अंग के रूप मे एक जोड़ी अंडसाय पाया जाता है जिसमे मद युग्मक अंडणु/ओवम/यंदा का निर्माण होता है |
- युग्मक जनन – लेंगीक प्रजनन मे सहायक प्रमुख जनन अंगों (वृषण /अंडसाय )से युग्मक निर्माण (शुक्राणु /अंडाणु ) की प्रक्रिया युग्मक जनन कहलाती है |
- सरंचना – कोशिका सिद्धांत के प्रतिपादक मेथियास जैकब और श्रवण ने शुक्राणु और अंडाणु की रचना बताई |
- प्रमुख नर जनन कोशिका – ल्यूवेनहॉक ने नर जनन कोशिका (शुक्राणु) की खोज की एवं वर्णन किया |
- शुक्राणु – मानव शरीर की सबसे छोटी कोशिका शुक्राणु होती है जिसकी निर्माण शुक्रजनन प्रक्रिया द्वारा नर जनन अंग या नर जनन ग्रन्थि वृषण मे होती है |
- प्रमुख मादा जनन कोशिका – ल्यूवेनहॉक ने मादा जनन कोशिका (अंडाणु)की खोज की एवं वर्णन किया |
- अंडाणु– मानव शरीर की सबसे बड़ी कोशिका अंडाणु होती है जिसका निर्माण मादा जनन अंग या मादा जनन ग्रन्थि अंडासाय मे होती है |
- निषेचन (fertilization) – नर युग्मक शुक्राणु और मादा युग्मक अंडाणु संलयन की प्रक्रिया को निसेचन कहा जाता है | निसेचन दो प्रकार के होते हैं -आंतरिक निसेचन , बाह्य निसेचन |
- मानव प्रजनन तंत्र (Human reproductive system) -मानव जरायुज (viviparous)प्राणी होते है,अर्थात सीधे शिशुओ को जन्म देने की प्रवृति रखते है|मानव मे जनन अंग मादा मे 12 से 13 वर्ष की उउम्र मे तथा नर मे 15 से 18 वर्ष की उम्र मे प्रायः क्रियाशील हो जाते है|प्रजनन अंग भी कुछ हार्मोन का स्त्राव करते है,जो शरीर अनेक प्रकार के परिवर्तन लाते है|ऐसे परिवर्तन नर तथा मादा मे लाईगिक लक्षणों का विकास करते है|
- आंतरिक निषेचन – जब निषेचन प्रक्रिया शरीर के अंदर सम्पन्न होती है,तब इसे आंतरिक निषेचन कहते है| मनुष्य मे मादा के फेलोपीयन ट्यूब , अंडावाहिनी या ओविडक्ट मे होता है|
- बहय निषेचन – जब निषेचन प्रक्रिया जीव शरीर के बाहर सम्पन्न होती है, तब इसे बहय निषेचन कहा जाता है|उभयचर जैसे मेढक या सत्यमछली , समुद्री घोडा मे बहय निषेचन होता है|
नर प्रजनन अंग – नर प्रजनन कोशिका का उत्पादन एवं जनन कोशिकाओ की निषेचन के स्थान तक पहुचने वाले अंग संयुक्त रूप से नर प्रजनन तंत्र कहलाता है| नर प्रजनन अंगों के अंतर्गत वृषण , शुक्राणु , शिशन आदि 17 अंग आते है, जिनमे दो ग्रंथियों के ऊपर एवं प्रोस्टेट शामिल होते है|
वृषण testis – नर प्रजनन तंत्र मे प्रमुख नर जनन अंग के रूप मे वृषण पाया जाता है वृषण एक नर जनन ग्रंथिया है, जो टेस्टोस्टेरॉन नामक पुरुष विकास हार्मोन के निर्माण हेतु उत्तरदायी होती है| वृषण मे शुक्राणु प्रक्रिया से अर्द्धसूत्री विभाजन द्वारा उत्पाद के रूप मे चार नर जनन कोशिका अर्थात शुक्राणु का निर्माण होता है| शुक्राणु उत्पादन के लिए आवश्यक ताप शरीर के ताप से कम केवल वृषण कोष मे स्थित वृषण मे पाया जाता है| शुक्राणु निर्माण प्रक्रिया शरीर के सबसे ठंडे अंग वृषण मे सम्पन्न होते है|
शुक्रशय – शुक्राणुओ का निर्माण वृषण मे सम्पन्न होता है एसलिए वृषण एक फेक्टरी की तरह कार्य करती है, जबकि शुक्राणुओ का संग्रहण , शुक्रशय मे होता है एसलिए शुक्रशय से कुछ मात्रा मे शुक्रिय द्रव का निर्माण होता है, साथ ही इस प्रक्रिया मे प्रोस्टेट ग्रन्थि भी सहायक है| शूकरोधद्रव मे शुक्राणु मिले होते है जो सरटोली कोशिकाओ द्वारा अपना पोषण प्राप्त करते है| शुक्राणु पुरुष के शरीर मे 30 दिन तक जीवित रहते है, जबकि स्त्रियों की फेलोपीयन ट्यूब / डिंबावहिनी / अंडावाहिनी मे केवल 48-72 घंटे (3-2)दिन जीवित रहते है|
वृषण मे उपस्थित कोशिकाएं -अंतराली कोशिकाएं – वृषण के अंदर स्थित अंतराली कोशिकाओं से नर हार्मोन सत्रवित होते हैं , नर हार्मोन (एंड्रॉजोन्स ) कहते हैं |प्रमुख एन्ड्रोजॉन्स अर्थात नर हार्मोन को टेस्टोस्टेरॉन ,कोलेस्ट्रॉल (स्टेरॉल स्टेराइड +एल्कोहॉल )का उत्तपन टेस्टोस्टेरिन को माना जाता है | टेस्टोस्टेरॉन को पुरुस विकास हार्मोन कहते हैं | यह हार्मोन पुरुस मे द्वेतया लेंगीक लक्षणों के विकास को प्रेरित एवं निर्धारित कर्ता है
सरटॉली सेल – वृषण मे उपस्थित सरटॉली सेल शुक्राणुओं को फ्रक्टोस के रूप मे पोषण प्रदान करते हैं अर्थात फ्रक्टोस शर्करा शुक्राणुओं को ऊर्जा प्रदान करते हैं |
मादा प्रजनन अंग -अंडाशय -प्रत्येक मादा मे एक जोड़ी अंडाशय पाए जाते हैं | अंडाशय के भीतर अंडाणुओं का एण्ड जनन प्रक्रिया द्वारा निर्माण होता है \ अंडाशय का मुख्य कार्य स्वस्थ अंडाणु को निर्मित करना |अंडाशय से दो हार्मोन एस्ट्रोजॉन तथा पोजेस्टरण का स्त्राव होता है , जो ऋतु स्त्राव को नियंत्रित कर्ता है | अंडाशय को ग्रेफियन फ़ेलीकल मे उपस्थित थीका इंटर्न कोशिकाओं से नारी विकास हार्मोन एस्ट्रेजन का उत्सर्जन होता है | अंडाशय मे स्थित कॉरपस ल्यूटीयम नामक सरंचना से प्रेग्नेंसी हार्मोन अर्थात प्रोजेस्टेरॉन एवं जन्म हार्मोन रिलेक्सीन का निर्माण होता है|
अंडावाहिनी या फैलोपियन नलिका – महिलाओ मे अंडावाहिनी या फैलोपियन नलिकों की संख्या दो होती है , जो गर्भाशय की उपरी भाग मे दोनों तरफ जुड़ी होती है | अंडोंत्सर्ग प्रक्रिया द्वारा अंडाणु जब अंडाशय से बाहर निकलकर फैलोपियन नलिका आ जाता है| फैलोपियन नलिका का प्रमुख कार्य अंडाणु को पकड़ना और गर्भाशय मे पहुचना है| फैलोपियन ट्यूब मे शुक्राणु (नर युग्मक / मानव शरीर की सबसे छोटी कोशिका / नर जनन कोशिका ) और अंडाणु (मादा युग्मक / मानव शरीर की सबसे बड़ी कोशिका / मादा जनन कोशिका ) की मिलन प्रक्रिया निषेचन पूर्ण अर्थात सम्पन्न होती है |
मनुष्य मे निषेचन प्रक्रिया शरीर के अंदर फैलोपियन ट्यूब मे सम्पन्न होती है इसलिए मनुष्य मे अंतः निषेचन पाया जाता है | फैलोपियन नलिका से निषेचन अंडाणु गर्भाशय मे पहुचता है|
गर्भाशय –गर्भाशय का प्रमुख कार्य निषेचन अंडाणुओ से भ्रूण के विकास हेतु उचित स्थान प्रदान करना है| गर्भाशय के अंदर रक्षात्मक आवरण प्लेसेन्टा या अपरा द्वारा शिशु को सुरक्षा एवं पोषण प्राप्त होता है|
भ्रूणीय अवस्था – भ्रूण की तीन अवस्था होती है –
- मोरूला – लगभग 16 ठोस गेंद जैसी कोशिकीय सारांचना मोरूला कहलाती है|
- ब्लास्तुला अवस्था –लगभग 62-150 खोखली गेंद जैसी कोशिकीय सरंचना ब्लास्तुला कहलाती है|
स्टेम सेल या स्तम्भ कोशिकाए – ब्लास्तुला अवस्था से ही चमत्कारिक स्तंभ कोशिकाए या स्टेम सेल प्राप्त होती है जो किसी भी अंग की कोशिका के रूप मे रूपांतरित होने की प्रवृति रखती है|
क्लोनिग – सम्पूर्ण ब्लास्तुला अवस्था को यदि सेरोगेट मदर के गर्भ मे प्रतिस्थापित कर दिए जाने पर क्लोन की प्राप्ति होती है|
3. गेस्तुला – भ्रूणीय विकास की गेस्तुला अवस्था मे सम्पूर्ण शरीर का निर्माण भ्रूण के तीन स्तर से होता है, जो क्रमश एक्टोडर्म , मिजोडर्म एवं एन्सीडर्म कहलाता है –
- एक्टोडर्म – भ्रूण की सबसे बहय परत या सबसे बाहर स्तर जिससे तंत्रिका कोशिका अर्थात न्यूरॉन , त्वचा , बाल , आँख , कान निर्मित होता है|
- मिजोडर्म – भ्रूण की माध्यम पर्त जिससे संयोजी उत्तकों , हृदय एवं किडनी आदि उत्सर्जी तंत्र का निर्माण होता है| मानव शरीर का सबसे कठोर संयोजी उत्तक हड्डी कहलाता है| शरीर का सबसे मुलायम संयोजी उत्तक रक्त का निर्माण मिजोडर्म से होता है|
प्रश्न
- वृषण की कार्यात्मक इकाई है|- सेमीनीफेरस नलिका
- स्त्री युग्मक को कहा जाता है|- अंडाणु
- निषेचन से बनता है – भ्रूण (विकसित )