परमाणु संरचना (Atomic Structure)
✦ परमाणु– किसी पदार्थ की सबसे छोटी इकाई या सूक्ष्म कण, जिन्हें सामान्य आँखों की सहायता से नहीं देखा जा सकता और जो रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेते हैं, परंतु इसका अस्तित्व पूरे परमाणु कहलाता है। परमाणु विद्युत का उदासीन कण होता है।
✦ डाल्टन का परमाणुवाद (मॉडल – डाल्टन का परमाणुवाद)-इसे John Dalton द्वारा 1808 में खोजा गया था।
Atomic Theory →संसार की प्रत्येक वस्तु का निर्माण छोटे-छोटे सूक्ष्म कणों से होता है जिन्हें खंडित नहीं किया जा सकता।
✦ पाश्चात्य भारतीय रसायन विज्ञान का पिता– महर्षि कणाद ने 6 दर्शनों में से एक प्रसिद्ध दर्शन वैशेषिक दर्शन (पदार्थ विज्ञान) में बताया था कि संसार में उपस्थित वस्तुओं में विभिन्न तत्वों के सूक्ष्म कणों के मिलने से ही होते हैं। बाद में इन्हीं सूक्ष्म कणों को डाल्टन ने अपने परमाणुवाद सिद्धांत में परमाणु नाम दिया।
✦ परमाणुवाद का खंडन →
परमाणु अविभाज्य है — तो इसे e⁻, p⁺ व n⁰ में विभाजित क्यों ?
परमाणु अविनाशी है — परमाणु के नाभिक में ऊर्जा ,तो e⁻ का चक्कर |
अणु निर्माण प्रक्रिया —परमाणु + परमाणु → संयुक्त परमाणु गलत ,लेकिन परमाणु +परमाणु = अणु सही
✦ वर्णांधता →वर्णांधता नामक अनुवांशिक बीमारी के कारण रंग में फर्क कर पाने में असमर्थता होती है। इसलिए रसायन विज्ञान में परमाणु की खोज जैसे क्रांतिकारी योगदान के लिए उनके सम्मान में वर्णांधता को आज डाल्टोनिज्म के नाम से भी जाना जाता है।
एनोड किरणें →1886 ई० में गोल्डस्टीन ने एनोड किरणों की खोज की एवं इस बात का पता लगाया कि एनोड किरणें धनावेशित रचक कण प्रोटॉन से मिलकर बनी होती हैं।
कैथोड किरणें →1897 में जे. जे. थॉमसन ने कैथोड किरणों की खोज की एवं इस बात का पता लगाया कि कैथोड किरणें ऋणावेशित रचक कण इलेक्ट्रॉन से मिलकर बनी होती हैं।
याद रखने योग्य बिंदु
परमाणु की खोज — 1808 ई० में डाल्टन
नाभिक की खोज — 1911 (रदरफोर्ड)
e⁻ की खोज — 1897 (थॉमसन)
परमाणु क्रमांक — p⁺ की संख्या
p⁺ की खोज — 1886 (गोल्डस्टीन)
e⁻ का चक्कर की खोज — 1911
परमाणु त्रिज्या का मापन — नैनोमीटर → (10⁻⁹ m = 10⁻⁷ cm)
नाभिक त्रिज्या का मापन — फर्मी मात्रक (1 f = 10⁻¹⁵ m = 10⁻¹³ cm)
पदार्थ — द्रव्यमान एवं आयतन(रचक कण )
1.अणु (स्थायी रचक कण)2.परमाणु (अस्थायी रचक कण)
(0.01%) तीन अस्थायी मूलभूत कण
1932 — पॉजिट्रॉन — एंडरसन
1935 — मेसॉन — युकावा
1930 — न्यूट्रीनो — पाउली
(99%) तीन स्थायी मूलभूत कण
1886 — प्रोटॉन — गोल्डस्टीन/रंड किरण
1897 — इलेक्ट्रॉन — जे. जे. थॉमसन
1932 — न्यूट्रॉन — जेम्स चैडविक
आज मूल कणों की संख्या 30 से ऊपर पहुँच चुकी है, जो कुछ प्रमुख कण इस प्रकार है –
★ परमाणु क्रमांक (Z) = प्रोटॉनों की संख्या / इलेक्ट्रॉनों की संख्या
★ द्रव्यमान संख्या (M) = प्रोटॉनों की संख्या + न्यूट्रॉनों की संख्या
★ न्यूट्रॉनों की संख्या (n) = द्रव्यमान संख्या (M) – प्रोटॉन / इलेक्ट्रॉनों की संख्या
★ परमाणु क्रमांक की खोज (Z) = मोजले (1913)
★ न्यूट्रीनो → पाउली के अनुसार – न्यूट्रॉन लगभग द्रव्यमान तथा आवेश रहित मूलभूत अवस्थायी कण हैं। नाभिक में स्थित न्यूट्रॉनों की संख्या नाभिक के भीतर जितने हैं। न्यूट्रॉनों के कारण गलत होता सिद्धांत सापेक्षता सिद्धांत (थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी / E = mc²)
★ मेसॉन → मेसॉन एक अवस्थायी मूलभूत कण है, जिसकी खोज 1935 ई० में युकावा ने की थी। यह तीन प्रकार का होता है – धनात्मक पाई मेसॉन, ऋणात्मक पाई मेसॉन एवं उदासीन पाई मेसॉन।
★ नाभिक → नाभिक की त्रिज्या 10⁻¹² cm होती है, जबकि परमाणु की त्रिज्या 10⁻⁸ cm होती है। परमाणु का नाभिक प्रोटॉन + न्यूट्रॉन से मिलकर बना होता है। परमाणु के नाभिक की खोज रदरफोर्ड ने की थी। परमाणु के नाभिक का आकार फर्मी नामक इकाई में अभिव्यक्त किया जाता है, जबकि परमाणु का आकार नैनोमीटर नामक इकाई में अभिव्यक्त किया जाता है।
★ समस्थानिक → ऐसे तत्व जिनके परमाणु क्रमांक समान तथा परमाणु द्रव्यमान असमान होते हैं, समस्थानिक कहलाते हैं।① सबसे ज्यादा समस्थानिक – Po (33)② हाइड्रोजन ऐसा तत्व है, जिसके समस्थानिक अलग-अलग होते हैं।
★ रेडियोसक्रिय समस्थानिक — उपयोग
Na-24 → शरीर में परिसंचरण तंत्र का विकार ज्ञात करने में।
P-32 → ल्यूकेमिया आदि के उपचार में।
I-131 → थायरॉइड ग्रंथि का विकार ज्ञात करने में।
Fe-59 → एनीमिया का रोग ज्ञात करने में।
CO-60 → कैंसर उपचार में।
U-238 → परमाणु भट्टी में ईंधन के रूप में।
As-74 → ट्यूमर की पहचान के लिए।
★ रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल → 1911 में रदरफोर्ड ने परमाणु की आंतरिक संरचना को समझाने के लिए रदरफोर्ड मॉडल प्रस्तुत किया था, जिसमें उन्होंने अल्फा कण एवं स्वर्ण पत्र प्रयोग सामग्री के रूप में लिया था। रदरफोर्ड मॉडल को सौरमंडल का प्रतिरूप या प्लेनेटरी मॉडल भी कहा जाता है। रदरफोर्ड ने नाभिक और कक्षा की खोज की थी। प्रोटॉन का नामकरण भी रदरफोर्ड ने ही किया था।
★ इलेक्ट्रॉन → मूल कणों में सबसे हल्का कण, जिसकी खोज 1897 में थॉमसन ने की थी। यह परमाणु के नाभिक के चारों ओर उपस्थित होता है जो विद्युत ऋणावेशित होता है। यह स्थायी मूलभूत कण होता है। यह कैथोड किरणों का निर्माण करता है। इसका द्रव्यमान 9.1 × 10⁻³¹ kg होता है तथा आवेश -1.6 × 10⁻¹⁹ C होता है।
★ प्रोटॉन → p⁺ की खोज गोल्डस्टीन ने 1886 में किया था जबकि नामकरण 1911 में रदरफोर्ड ने किया था। यह परमाणु के नाभिक में उपस्थित होता है। यह विद्युत धनावेशित होता है। इसका आवेश +1.6 × 10⁻¹⁹ C होता है। यह एनोड किरणों का उत्पादन करता है। इसका द्रव्यमान 1.67 × 10⁻²⁷ kg होता है।
समभारिक → जिन जिन तत्वों के ऐसे परमाणु जिनमें प्रोटॉनों की संख्या भिन्न-भिन्न परन्तु द्रव्यमान समान होता है, समभारिक कहलाते हैं।Ex – ⁴⁰₁₈Ar , ⁴⁰₁₉K , ⁴⁰₂₀Ca
हंड का नियम क्या कहता है?
→ जब किसी परमाणु में समान ऊर्जा वाले ऑर्बिटल उपलब्ध होते हैं, तो इलेक्ट्रॉन पहले उन सभी ऑर्बिटल में एक-एक करके और समान स्पिन के साथ भरते हैं। उसके बाद ही किसी ऑर्बिटल में दूसरा इलेक्ट्रॉन जोड़ा जाता है।सरल शब्दों में –(1) इलेक्ट्रॉन पहले अलग-अलग ऑर्बिटल में अकेले बैठना पसंद करते हैं।(2) सभी ऑर्बिटल में एक-एक इलेक्ट्रॉन भर जाने के बाद ही जोड़ी बनती है।यह नियम जर्मन भौतिक वैज्ञानिक Friedrich Hund ने दिया था।
उदाहरण – मान लीजिए p-orbital में 3 orbital होते हैं px, py, pz और तीन इलेक्ट्रॉन भरने हैं तोpx↑ , py↑ , pz↑ ऐसे भरेंगे।
जबकि px↑↓ , py↑ , pz ऐसे नहीं होंगे।
बोहर का मॉडल → नील्स बोहर ने 1913 में रदरफोर्ड के मॉडल की त्रुटि विकसित किया और यह सिद्धांत दिया कि इलेक्ट्रॉन निश्चित कक्षाओं में रहते हैं। इन कक्षाओं को ऊर्जा स्तर कहा जाता है।
ऑफबाउ सिद्धांत के नियम → जिस सबशेल के लिए (n+1) का मान कम होता है, तब इलेक्ट्रॉन उस सबशेल में प्रवेश करता है, जिसके लिए n+1 का मान कम है।(यहाँ n और 1 क्रमशः मुख्य क्वांटम संख्या तथा दिगंशीय क्वांटम संख्या हैं।)कक्षकों की ऊर्जाओं का बढ़ता क्रम इस प्रकार है –1s < 2s < 2p < 3s < 3p < 4s < 5s < 4d < 5p < 6s < 4f < 5d < 6p < 7s ……
इस प्रकार उच्च ऊर्जा वाले कक्षक अंत में भरे जाते हैं। इन क्रमों की नीचे लिखे अनुसार व्याख्या की जा सकती है। यद्यपि 5g, 6g, 6h, 7g, 7h, 7d, 7f कक्षक भी संभव हैं लेकिन सामान्य दशाओं में इलेक्ट्रॉन इनमें प्रवेश नहीं करते हैं।
उदाहरण – Na = 1s², 2s²2p⁶, 3s¹ ; N = 1s², 2s²2p³
✶ पाउली का अपवर्जन नियम →इस नियम के अनुसार किसी परमाणु में किन्हीं दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वांटम संख्याओं के मान एक समान नहीं हो सकते। अर्थात् किसी इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा व स्थिति का वर्णन करने के लिए चारों क्वांटम संख्याओं (K, L, M व N) की आवश्यकता पड़ती है।
किसी परमाणु में किन्हीं दो इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा व स्थिति बिल्कुल एक जैसी नहीं हो सकती। अतः इनकी क्वांटम संख्याएँ भी एक समान नहीं हो सकती।
✶ ऑर्बिटल और क्वांटम संख्याएँ
s-ऑर्बिटल → यह गोलाकार होता है और एक ऊर्जा स्तर पर केवल 2e⁻ होते हैं।
p-ऑर्बिटल → यह तीन डम्बल जैसी आकार का होता है और एक ऊर्जा स्तर पर 6 इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं।
d-ऑर्बिटल → यह अधिक जटिल आकार का होता है और एक ऊर्जा स्तर पर 10 इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं।
f-ऑर्बिटल → यह सबसे जटिल आकार वाले होते हैं और एक ऊर्जा स्तर पर 14 इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं।
✶ इलेक्ट्रॉनिक विन्यास →किसी तत्व के परमाणु में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों का कक्षाओं एवं उपकक्षाओं में वितरण उसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास कहलाता है।Ex → Na(11) = 2,8,1 ; Mg(12) = 2,8,2 etc.
question
1.इलेक्ट्रॉन की खोज किसने की थी? → थॉमसन
2.इलेक्ट्रॉन पर क्या आवेश होता है? → ऋणात्मक
3.प्रोटॉन का सापेक्ष द्रव्यमान क्या है? → 1
4.कार्बन का परमाणु क्रमांक क्या है? → 6
5.निम्न में से कौन-सा ऋणात्मक आवेशित उपपरमाण्विक कण है? → इलेक्ट्रॉन
6.किसी परमाणु की द्रव्यमान संख्या किसके बराबर होती है? → p⁺ + n°
7.परमाणु का कौन-सा मॉडल ऊर्जा स्तरों की संकल्पना देता है? → बोर मॉडल
8. M कक्षा में अधिकतम कितने इलेक्ट्रॉन रह सकते हैं? → 18
9.निम्न में से कौन-सा परमाणु का मूलभूत कण नहीं है? → फोटॉन
10.किस वैज्ञानिक ने कहा कि इलेक्ट्रॉन निश्चित कक्षाओं में घूमते हैं? → बोर
11.किसी तत्व का सबसे छोटा कण जो उसके रासायनिक गुणों को बनाए रखे, वह क्या है? → परमाणु
12.निम्न में से कौन-सा बोर के मॉडल पर लागू नहीं होता? → दीर्घवृत्तीय कक्षाएँ
13.निम्न में से किसकी पैठने की क्षमता सबसे अधिक होती है? → गामा किरणें