ऊतक परिचय
परिभाषा: ऐसी कोशिकाओं का समूह जो संरचना (structure) में समान होती हैं और किसी विशिष्ट कार्य को एक साथ मिलकर पूरा करती हैं, ऊतक (Tissue) कहलाती हैं।
हिस्टोलॉजी (Histology):
विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत ऊतकों का अध्ययन किया जाता है, उसे हिस्टोलॉजी या ‘औतशिकी’ कहते हैं।
क्या पौधे और जानवर एक ही तरह के ऊतकों से बने हैं?
–>नहीं! पौधों को स्थिर रहना होता है, इसलिए उन्हें सहारा देने वाले (mechanical support) मृत ऊतकों की ज्यादा जरूरत होती है।
–>जानवरों को भोजन और आश्रय के लिए चलना-फिरना पड़ता है, इसलिए उनके अधिकांश ऊतक जीवित होते हैं और उन्हें अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
पादप ऊतक (Plant Tissues)
पौधों में विकास कुछ निश्चित क्षेत्रों में ही होता है। इस आधार पर पादप ऊतकों को दो मुख्य भागों में बांटा गया है:
(A) विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue)
ये वे ऊतक हैं जिनकी कोशिकाओं में लगातार विभाजन (division) करने की क्षमता होती है। ये पौधे के बढ़ने वाले भागों में पाए जाते हैं।
विशेषताएं: इनकी कोशिकाएं बहुत सक्रिय होती हैं, साइटोप्लाज्म (कोशिकाद्रव्य) घना होता है, और इनमें रसधानी (vacuole) नहीं होती।
प्रकार:
शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical Meristem): यह जड़ों और तनों के शीर्ष (tips) पर होता है और उनकी लंबाई बढ़ाता है।
अंतर्विष्ट विभज्योतक (Intercalary Meristem): यह पत्तियों के आधार या टहनियों के पर्व (internodes) के पास होता है (जैसे घास में)।
पार्श्व विभज्योतक (Lateral Meristem / Cambium): यह तने या जड़ की परिधि (मोटाई या गर्थ) को बढ़ाता है।
(B) स्थायी ऊतक (Permanent Tissue)
जब विभज्योतक ऊतक की कोशिकाएं विभाजित होने की क्षमता खो देती हैं और एक निश्चित आकार और कार्य ले लेती हैं, तो वे स्थायी ऊतक बन जाती हैं। इस प्रक्रिया को विभेदीकरण (Differentiation) कहते हैं।
1. सरल स्थायी ऊतक (Simple Permanent Tissue) – ये एक ही प्रकार की कोशिकाओं से बने होते हैं।
पेरेंकाइमा (Parenchyma):यह सबसे बेसिक और जीवित कोशिकाओं का समूह है। इनकी कोशिका भित्ति पतली होती है और कोशिकाओं के बीच काफी जगह (intercellular space) होती है।
काम: भोजन का संचय (storage) करना।
क्लोरेनकाइमा (Chlorenchyma): जब पेरेंकाइमा में क्लोरोफिल पाया जाता है, तो यह प्रकाश संश्लेषण करता है।
एरेनकाइमा (Aerenchyma): जलीय पौधों में कोशिकाओं के बीच हवा की बड़ी गुहाएं होती हैं, जो पौधे को तैरने में मदद करती हैं।
कोलेनकाइमा (Collenchyma):यह भी जीवित कोशिकाएं हैं, लेकिन इनके कोने पेक्टिन के जमाव के कारण मोटे होते हैं। कोशिकाओं के बीच जगह बहुत कम होती है।
काम: यह पौधों को लचीलापन (flexibility) देता है, जिससे टहनियाँ बिना टूटे मुड़ जाती हैं।
स्क्लेरेंकाइमा (Sclerenchyma):यह मृत (dead) कोशिकाओं से बना होता है। इसकी भित्ति लिग्निन (Lignin) के कारण बहुत मोटी और कठोर होती है। कोशिकाओं के बीच कोई जगह नहीं होती।
काम: पौधे को मजबूती और कठोरता देना (जैसे- नारियल के छिलके/रेशे, बीज के कड़े छिलके)।
2. जटिल स्थायी ऊतक (Complex Permanent Tissue) – ये एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बनते हैं और एक इकाई की तरह काम करते हैं। इन्हें संवहन ऊतक (Vascular Tissue) भी कहते हैं।
जाइलम (Xylem): यह मुख्य रूप से मृत कोशिकाओं से बना होता है (जाइलम पेरेंकाइमा को छोड़कर)।
घटक: ट्रेकिड्स (वाहिनिका), वेसल्स (वाहिका), जाइलम पेरेंकाइमा, और जाइलम फाइबर्स (रेशे)।
काम: जड़ों से पानी और खनिज लवणों को ऊपर पत्तियों तक पहुँचाना (एकदिशीय – Unidirectional प्रवाह)।
फ्लोएम (Phloem): यह मुख्य रूप से जीवित कोशिकाओं से बना होता है (फ्लोएम फाइबर को छोड़कर)।
घटक: चालनी नलिका (Sieve tubes), साथी कोशिकाएं (Companion cells), फ्लोएम पेरेंकाइमा, और फ्लोएम फाइबर्स।
काम: पत्तियों में बने भोजन को पौधे के अन्य भागों तक पहुँचाना (द्विदिशीय – Bidirectional प्रवाह)।
3. जंतु ऊतक (Animal Tissues)
कार्य के आधार पर जंतु ऊतकों को चार मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:
(A) एपिथेलियल ऊतक (Epithelial Tissue)
यह शरीर को ढकने या बाहरी रक्षा करने वाला ऊतक है। यह अंगों और गुहाओं (cavities) को अंदर से भी ढकता है। कोशिकाएं आपस में कसकर जुड़ी होती हैं।
शल्की एपिथेलियम (Squamous): अत्यधिक पतली और चपटी कोशिकाएं। (उदा: रक्त वाहिनी, फेफड़ों के कूपिका, त्वचा की बाहरी परत)।
स्तंभाकार एपिथेलियम (Columnar): खंभे जैसी लंबी कोशिकाएं, जो अवशोषण और स्राव में मदद करती हैं। (उदा: आंत की अंदरूनी परत)। यदि इनमें बाल जैसी संरचनाएं (Cilia) हों, तो इन्हें पक्ष्माभी (Ciliated) एपिथेलियम कहते हैं (जैसे श्वास नली में)।
घनाकार एपिथेलियम (Cuboidal): घन (cube) के आकार की कोशिकाएं, जो यांत्रिक सहारा देती हैं। (उदा: गुर्दे की नली, लार ग्रंथि)।
ग्रंथिल एपिथेलियम (Glandular): जब एपिथेलियम का कुछ भाग अंदर की ओर मुड़कर ग्रंथि बनाता है और पदार्थों का स्राव करता है।
(B) संयोजी ऊतक (Connective Tissue)
इसकी कोशिकाएं आपस में कम जुड़ी होती हैं और एक अंतर-कोशिकीय आधात्री (Matrix) में धँसी होती हैं। इसका मुख्य काम अंगों को जोड़ना है।
रक्त (Blood): इसका तरल आधात्री भाग प्लाज्मा कहलाता है, जिसमें RBC, WBC और प्लेटलेट्स तैरते हैं। यह गैसों, पचे भोजन और हार्मोन का संवहन करता है।
अस्थि (Bone): यह कठोर और मजबूत ऊतक है। इसका मैट्रिक्स कैल्शियम और फास्फोरस से बना होता है। यह शरीर का कंकाल बनाता है।
लिगामेंट और टेंडन:
लिगामेंट (स्नायु): जो अस्थि को अस्थि (Bone to Bone) से जोड़ता है। यह बहुत लचीला होता है।
टेंडन (कंडरा): जो मांसपेशियों को अस्थि (Muscle to Bone) से जोड़ता है। यह मजबूत लेकिन कम लचीला होता है।
उपास्थि (Cartilage): इसका मैट्रिक्स प्रोटीन और शुगर का बना होता है, जिससे यह लचीला होता है। (उदा: नाक, कान, कंठ में)।
एरियोलर ऊतक (Areolar): यह त्वचा और मांसपेशियों के बीच, अंगों के चारों ओर पाया जाता है। यह आंतरिक अंगों को सहारा देता है और ऊतकों की मरम्मत करता है।
एडिपोज ऊतक (Adipose – वसामय ऊतक): यह त्वचा के नीचे आंतरिक अंगों के बीच पाया जाता है। इसकी कोशिकाएं वसा (fat) से भरी होती हैं, इसलिए यह ऊष्मा कुचालक (Insulator) का काम करता है।
(C) पेशी ऊतक (Muscular Tissue)
यह लंबी कोशिकाओं का बना होता है, जिन्हें पेशीय रेशा (muscle fiber) कहते हैं। इनमें एक विशेष प्रोटीन होता है जिसे सिकुड़ने वाला प्रोटीन (contractile protein) कहते हैं, जो फैलने और सिकुड़ने से गति पैदा करता है।
रेखित पेशी (Striated / Voluntary Muscles): ये हमारी इच्छा के अनुसार काम करती हैं (ऐच्छिक पेशी)। इनके ऊपर हल्के और गहरे रंग की पट्टियां (striations) होती हैं। ये बहुकेंद्रकीय (multinucleated) होती हैं। (उदा: हाथ-पैर की मांसपेशियां)।
अरेखित पेशी (Smooth / Involuntary Muscles): ये हमारी इच्छा के अधीन नहीं होतीं (अनैच्छिक पेशी)। ये तर्कुरूपी (spindle-shaped) और एक-केंद्रकीय होती हैं। (उदा: आहार नाल, आंख की पलकें, मूत्रवाहिनी)।
कार्डियक पेशी (Cardiac / Heart Muscles): ये दिल की दीवार में पाई जाने वाली अनैच्छिक पेशियां हैं। ये जीवनभर बिना थके लयबद्ध तरीके से सिकुड़ती और फैलती हैं। ये बेलनाकार और शाखान्वित (branched) होती हैं।
(D) तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue)
सभी कोशिकाएं उत्तेजना के अनुकूल प्रतिक्रिया करने की क्षमता रखती हैं, लेकिन तंत्रिका ऊतक की कोशिकाएं बहुत तेजी से उत्तेजित होती हैं और इस उत्तेजना को पूरे शरीर में ट्रांसफर करती हैं।
स्थान: मस्तिष्क, मेरुरज्जु (Spinal cord) और तंत्रिकाएं सभी इसी से बनी हैं।
न्यूरॉन (Neuron): तंत्रिका ऊतक की इकाई को न्यूरॉन या तंत्रिका कोशिका कहते हैं।
संरचना: इसमें एक मुख्य भाग कोशिका काय (Cell body/Cyton) होता है जिसमें केंद्रक होता है। इससे लंबे पतले बाल जैसे प्रवर्ध निकलते हैं जिन्हें डेंड्राइट्स (Dendrites) कहते हैं, और एक बहुत लंबा प्रवर्ध होता है जिसे एक्सॉन (Axon) कहते हैं।
ऊतक (Tissues) ऑनलाइन टेस्ट
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