चुम्बकत्व (Magnetism)

★ चुम्बकत्व क्या है?

BCE से 600 वर्ष पूर्व एशिया माइनर (वर्तमान तुर्की) के मैग्नीशिया नामक स्थान में ऐसे पत्थर पाये गए, जिनमें आकर्षण व दैशिक गुण थे। चूंकि ये पत्थर मैग्नीशिया नामक स्थान में पाये गए थे, इसलिए इन्हें मैग्नेट कहा जाने लगा। मैग्नेट को हिन्दी में चुम्बक कहते हैं। ये पत्थर वास्तव में लोहे के “मैग्नेटाइट” नाम के ऑक्साइड (Fe_3O_4) हैं, जो पृथ्वी के प्रत्येक स्थान पर पाये जाते हैं।

चुम्बक के प्रकार

निर्माण के आधार पर:

1. प्राकृतिक चुम्बक 2. कृत्रिम चुम्बक

गुणों के आधार पर

1. स्थायी चुम्बक 2. अस्थायी चुम्बक

प्राकृतिक चुम्बक

प्रकृति में स्वतंत्र रूप से पाये जाने वाले चुम्बक प्राकृतिक चुम्बक कहलाते हैं। प्राकृतिक रूप से खोजे गए पत्थर को लोडस्टोन कहते हैं। लोडस्टोन से तात्पर्य ऐसा पत्थर जो दिशा बताए, वर्तमान में इसे चुम्बक पत्थर कहा जाता है।

कृत्रिम चुम्बक

कुछ वस्तुओं को कृत्रिम विधि द्वारा चुम्बक बनाया जा सकता है, ऐसे चुम्बक को कृत्रिम चुम्बक कहते हैं।एक ऐसा चुम्बक है जिसे लोहे या स्टील जैसे पदार्थ से बनाया जाता है और इसे चुम्बकीय बनाने की प्रक्रिया के माध्यम से इसे चुम्बकीय बना दिया जाता है जो कि प्राकृतिक चुम्बक से अलग है।

चुम्बक के गुण

  1. चुम्बक लोहे को अपनी ओर खींचती है।
  2. घूमने के लिए स्वतंत्र चुम्बक सदैव उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरती है।
  3. चुम्बक के समान ध्रुवों के बीच विकर्षण व दो विपरीत ध्रुवों के बीच आकर्षण होता है।
  4. शक्तिशाली चुम्बक के समीप लोहे के टुकड़े को लाने पर, लोहा भी एक चुम्बक की तरह व्यवहार करने लगता है।
  5. चुम्बक के दोनों ध्रुवों को अलग नहीं किया जा सकता।

चुम्बकीय क्षेत्र

छड़ चुम्बक

① छड़ चुम्बक एक अस्थायी चुम्बक है, इसका चुम्बकीय क्षेत्र एक जैसा ही रहता है।

② इसकी चुम्बकीय शक्ति कम या अधिक नहीं किया जा सकता है।

③ यह कम शक्ति वाली चुम्बक है।

④ इसके सिरों की ध्रुवता स्वतः नहीं बदलती।

विद्युत चुम्बक

① विद्युत चुम्बक अस्थायी चुम्बक है, इसका चुम्बकत्व उसी समय तक रहता है जब तक धारा प्रवाहित है।

② कुण्डली में प्रवाहित होने वाली धारा का मान बदलकर चुम्बकीय शक्ति इच्छानुसार बदली जा सकती है।

③ विद्युत चुम्बकों द्वारा शक्तिशाली क्षेत्र भी उत्पन्न कर सकते है।

④ धारा प्रवाह की दिशा उलट देने से इसकी ध्रुवता बदली जा सकती है।

दो चुम्बकों के विपरीत ध्रुव

आकर्षित व प्रतिकर्षितचुम्बकीय सुई पर एक बल लगता है जो सुई को घुमा कर निश्चित दिशा में रोक देता है। इस बल को- आघूर्ण कहते है।चुम्बकीय क्षेत्र का मात्रक CGS पद्धति में गॉस तथा SI पद्धति में टेसला होता है। चुम्बकीय ।

चुम्बकीय बल रेखाओं के निम्न गुण

① चुम्बकीय बल रेखा सदैव उत्तरी ध्रुव से होकर दक्षिणी ध्रुव में समाप्त होती है।

② यह बल रेखा कभी एक दूसरे को नही काटती है।

③ ध्रुवों पर चुम्बकीय बल रेखाएं काफी पास पास होते है जिससे यह पता चलता कि ध्रुवों पर अन्य भागों की अपेक्षा चुम्बकीय क्षेत्र शक्तिशाली होता है।

चुम्बक पदार्थों के प्रकार

प्रतिचुम्बकीय पदार्थ

कुछ पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र में रखे जाने पर क्षेत्र की विपरीत दिशा में मामूली से चुम्बकीय हो जाते हैं। ये पदार्थ किसी शक्तिशाली चुम्बक के सिरे के समीप लाए जाने पर कुछ प्रतिकर्षित होते हैं। इन्हें प्रतिचुम्बकीय पदार्थ कहते हैं

जैसे – विस्मुथ, जस्ता, तांबा, चांदी, सोना, हीरा, नमक, जल, पारा, नाइट्रोजन, हाइड्रोजन प्रतिचुम्बकीय पदार्थ हैं।

अनुचुम्बकीय पदार्थ

कुछ पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र में रखे जाने पर क्षेत्र की ही दिशा में मामूली चुम्बकित हो जाते हैं तथा किसी शक्तिशाली चुम्बक के सिरे के समीप लाए जाने पर सिरे की ओर आकर्षित होते हैं, इन्हें अनुचुम्बकीय पदार्थ कहते हैं, व इनके गुण को अनुचुम्बकत्व कहते हैं।

लौहचुम्बकीय पदार्थ

कुछ पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र में रखे जाने पर क्षेत्र की दिशा में प्रबल रूप से चुम्बकित हो जाते हैं तथा किसी चुम्बक के सिरे के समीप लाए जाने पर सिरे की ओर तेजी से आकर्षित होते हैं। इन्हें लौहचुम्बकीय पदार्थ कहते हैं तथा इसके गुण को लौहचुम्बकत्व कहते हैं। Ex – लोहा, निकेल, कोबाल्ट, मैग्नेटाइट आदि।

भू-चुम्बकत्व

किसी चुम्बक को उसके गुरुत्व केन्द्र से बाँध कर लटका दिया जाए तो वह सदैव उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरता है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि पृथ्वी भी एक चुम्बक के भाँति व्यवहार करती है, जैसे इसके गर्भ में एक बहुत बड़ा चुम्बक रखा हो, जिसका दक्षिणी ध्रुव पृथ्वी की उत्तरी ध्रुव की ओर एवं उत्तरी ध्रुव पृथ्वी की दक्षिणी ध्रुव की ओर स्थित हो।

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