कुछ महत्वपूर्ण तथ्य
-① सबसे बड़ी ग्रंथि – लीवर / जिगर (सबसे बड़ा आंतरिक अंग)
② सबसे बड़ा अंग – त्वचा – (सबसे बड़ा बाह्य अंग)
③ हार्मोन शब्द का पहली बार प्रयोग स्टार्लिन ने 1905 में किया।
④ एण्डोक्रायनोलॉजी – अंत: स्त्रावी ग्रंथियों का अध्ययन एण्डोक्रायनोलॉजी कहलाता है।
अंत: स्त्रावी ग्रंथियां
पीयूष ग्रंथि
मानव शरीर में पायी जाने वाली सबसे छोटी ग्रंथि पीयूष ग्रंथि, पिट्यूटरी ग्रंथि या हाइपोथैलेमस ग्रंथि कहलाती है। मानव मस्तिष्क में उपस्थित यह ग्रंथि मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस भाग से जुड़ी रहती है इसलिए पीयूष ग्रंथि को ही हाइपोथैलेमस ग्रंथि भी कहा जाता है। इसका भार लगभग 0.6 ग्राम होता है। मानव शरीर में पाये जाने वाली सबसे छोटी अंत: स्त्रावी ग्रंथि पीयूष ग्रंथि कहलाती है।
ऑक्सीटॉसिन हार्मोन
हार्मोन के रूप में कार्य करने वाली प्रोटीन ऑक्सीटॉसिन कहलाती है। ऑक्सीटॉसिन हार्मोन 29 अमीनो अम्ल से मिलकर बना होता है, इसलिए यह पेप्टाइड हार्मोन कहलाता है।
लव हार्मोन
सजीवों में प्रेम या आलिंगन के लिए यही हार्मोन उत्तरदायी होता है।
ममत्व हार्मोन
ऑक्सीटॉसिन मानवीय संबंधों को गढ़ने में, माँ द्वारा अपनी संतान के प्रति दुलार या ममता का प्रदर्शन ऑक्सीटॉसिन हार्मोन द्वारा होता है। माँ और शिशु के बीच गले लगना तथा चूमना ऑक्सीटॉसिन हार्मोन के स्रवण को प्रेरित करता है।
दुग्धप्रेरक हार्मोन
शिशु के जन्म के बाद यह स्त्रियों से दुग्ध के स्रव को प्रेरित करता है, अतः इसे दुग्ध निष्कासन हार्मोन भी कहते हैं।
पिटोसिन हार्मोन
गाय, भैंसों के थनों से दुग्ध उतारने के लिए कृत्रिम ऑक्सीटॉसिन हार्मोन का ही इंजेक्शन लगाया जाता है जिसे पिटोसिन के नाम से जाना जाता है। दुधारू पशु से ज्यादा दुग्ध उत्पादन हेतु पिटोसिन हार्मोन दिए जाने से उनके दुग्ध ग्रंथियों को प्रेरित कर ज्यादा दुग्ध उत्पादन में सहायक यह हार्मोन वर्तमान में कर्नाटक एंटीबायोटिक एवं फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड द्वारा निर्मित किया जा रहा है।
वैसोप्रेसिन हार्मोन / ADH या एंटी डाईयूरेटिक हार्मोन
–पीयूष ग्रंथि के पश्च भाग से स्रावित यह हार्मोन किडनी से जल अवशोषण की मात्रा को नियंत्रित करता है। वैसोप्रेसिन हार्मोन की कमी से किडनी पर जल संतुलन कार्य पर नियंत्रण न कर पाने के कारण ग्रसित व्यक्ति को डायबिटीज इंसिपिडस का सामना करना पड़ सकता है। चाय, कॉफी एवं शराब के सेवन से वैसोप्रेसिन की मात्रा पीयूष ग्रंथि के पश्च भाग से कम स्रावित होती है, जिसके कारण तीव्र यूरिनेशन (मूत्र त्याग) की इच्छा होती है। इस प्रकार संबंधित व्यक्ति में निर्जलीकरण की समस्या जल की कमी के कारण हो सकती है।
अवटु ग्रंथि या थाइराइड ग्रंथि
मानव शरीर की सबसे बड़ी अंतः स्रावी ग्रंथि (Thyroid gland) कहलाती है। मनुष्य के गले में स्थित यह ग्रंथि द्विपुण्ड रचना होती है जो श्वसनली के दोनों ओर स्थित होती है, दोनों पालियाँ आपस में संयोजी ऊतक इस्थमस द्वारा जुड़ी होती हैं। थाइराइड ग्रंथि के सामने फुली हुई संरचना एडम्स एप्पल (टेंटुआ) कहलाती है।
पैरावाटु या पैराथाइराइड ग्रंथि
मटर की आकृति की पालियुक्त ग्रंथिथी, जो थाइराइड ग्रंथि के पीछे स्थित होती है पैराथाइराइड ग्रंथि कहलाती है। पैराथाइराइड ग्रंथि एक मात्र वह अंत: स्रावी ग्रंथि है जो पीयूष ग्रंथि के आदेशों का पालन नही करती है। अपितु पीयूष ग्रंथि से स्वतंत्र होकर अपना कार्य करती है।
थाइमस ग्रंथि
थाइमस ग्रंथि एक द्विपैलित एवं लसीका अंग होती है जो सीने में स्थित होती है। थाइमस ग्रंथि जन्म के समय 10-12 ग्राम, यौवनावस्था में 20-30 ग्राम एवं यह ग्रंथि वृद्धावस्था में घटकर 3-6 ग्राम रह जाती है वृद्धों में थाइमोसिन हॉर्मोन का स्त्रवण घट जाता है जिसके कारण उनका प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर पड़ जाता है। व्यक्ति के प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत बनाने में थाइमोसिन हॉर्मोन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
पिनियल ग्रंथि
पिनियल अंत: स्रावी ग्रंथि मस्तिष्क के थैलेमस भाग में स्थित होती है (जैव घड़ी) जन्म के कुछ वर्षों (10 वर्ष) के बाद यह नष्ट होती है।
उपनाम- इसे तिसरी आँख का अवशेष, आत्मा का स्थान आदि नामों से पुकारा जाता है।
पिनियल ग्रंथि – शरीर में जैविक घड़ी का नियमन करके सोने, जगने का चक्र, शरीर के तापक्रम का निर्धारण, मासिक चक्र का निर्धारण भी करती है। मनुष्य में लगभग दस वर्ष के आयु के पश्चात पिनियल ग्रंथि कैल्सियम लवणों के कण जमा होने के कारण नष्ट होने लगती है। इन कणों को मस्तिष्क की रेत कहते हैं।
★ बाह्य स्रावी ग्रंथि के रूप में अग्नाशय 3 प्रमुख एन्जाइम को स्रावित करता है।
अग्नाशय ग्रंथि = पाचक रस
① ट्रिप्सिन② एमाइलेस③ लाइपेस
अंतःस्रावी तंत्र टेस्ट
25 प्रश्न | 40 सेकंड प्रति प्रश्न
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