मानव पाचन तंत्र
भोजन के छोटे पोषक तत्वों में बदलने का कार्य करते हैं – जो ऊर्जा, विकास और मरम्मत के लिए रक्त में अवशोषित होते हैं। यह दो मुख्य भागों से मिलकर बनता है।
अहार नाल
मुंह , कंठ , भोजन नली , पेट , छोटी आंत , बड़ी आंत , मलाशय , गुदा
सहायक ग्रंथि
लार ग्रंथि, यकृत (लिवर), पित्ताशय, अग्नाशय (पैनक्रियास)
पाचन
भोज्य पदार्थों की एंजाइम के साथ क्रिया पाचन कहलाती है। मानव शरीर में उपस्थित सभी एंजाइम रसों में पाये जाते हैं। पाचन प्रक्रिया बहिः स्रावी ग्रंथियों के स्राव एंजाइम का परिणाम है।जटिल भोज्य पदार्थों का एंजाइमों की उपस्थिति में सरल भोज्य पदार्थों में परिवर्तन की प्रक्रिया पाचन कहते हैं।पाचन क्रिया में सहयोगी अंगों को पाचन अंग कहा जाता है।
अपवाद- ग्रासनली, एवं लीवर
मुख
मनुष्य में भोजन का पाचन मुख से ही प्रारम्भ हो जाना है और यह छोटी आंत तक जारी रहता है, एवं बड़ी आंत में समाप्त हो जाता है। भोजन के मुख में अंतर्ग्रहण के बाद उसको दाँतो के द्वारा 32 बार चबाया जाना चाहिए जिससे वह महिन कणों में विभक्त हो जाता है। मुख में स्थित तीन जोड़ी लार ग्रंथियों द्वारा स्त्रावित लार से दाँतो द्वारा पीसा गया भोजन अच्छी तरह मिल जाता है मुख्य रूप से जिसे बोलस के नाम से जाना जाता है।
ग्रासनली / गर्दन
अब यह भोजन जीभ द्वारा ग्रसिका में भेज दिया जाता है जहाँ से यह क्रमानुकुंचन गति के द्वारा अमाशय में पहुँचता है। ग्रासनली किसी भी तरह के किसी भी रस का कोई स्त्रवण नही करता है।
अमाशय
अमाशय द्वारा अमाशय रस का स्त्रवण किया जाता है अमाशय रस को साधारण भाषा में जठर रस के नाम से भी जाना जाता है। अमाशय द्वारा स्त्रवण जठर रस का सबसे प्रमुख घटक Hcl भोजन में उपस्थित हानिकारक जीवाणुओं को भी नष्ट कर देता है। अमाशय में भोजन के पहुँचने पर Hcl भोजन से मिलकर टायलिन एंजाइम के क्षारीय प्रभाव को निष्क्रिय कर देता है; साथ ही Hcl की उपस्थिति भोजन को अम्लीय बना देता है।
अग्नाशय
अग्नाशय रस में ट्रिप्सिन, लाइपेज, एमाइलेज नामक एंजाइम पाये जाते हैं, जो भोजन के तीनों महत्वपूर्ण घटकों के रूप स्टार्च (कार्बोहाइड्रेट), प्रोटीन एवं वसा के पाचन में सहायक होते हैं, इसलिए अग्नाशय रस को पूर्ण पाचक रस की संज्ञा दी जाती है।
छोटी आँत
छोटी आँत तीन भागों में विभाजित होती है?
① अग्रभाग — डियोडिनम
② मध्य भाग — जेजुनम 2•5 मीटर
③ अंतिम भाग — इलियम 3•5 मीटर
पाचन क्रिया में सबसे ज्यादा रासायनिक प्रक्रम छोटी आँत में ही होती है। छोटी आँत की लम्बाई 6-7 मीटर होती है।छोटी आँत का मध्य भाग जेजुनम, आंत्रीय रस को स्त्रवण करता है अर्थात् यहाँ आन्त्र रस की क्रिया काइम पर होती है। आन्त्र रस क्षारीय होता है जिसका pH-8 होता है। एक स्वस्थ मनुष्य में लगभग 2 लीटर आन्त्र रस स्त्रावित होता है।अन्त्र रस में निम्नलिखित प्रकार के एंजाइम उपस्थित होते हैंइरेप्सिन, माल्टेज, लैक्टोस, इन्वर्टेज, सुक्रेस, लाइपेज जिसका कार्य अलग अलग होता है।
इरेप्सिन— यह शेष प्रोटीन एवं पेप्टोन को एमीनो अम्ल में परिवर्तित करता है।
माल्टेज — यह माल्टोज को ग्लुकोज में परिवर्तित करता है।
लैक्टोस — यह लैक्टोज को ग्लुकोज एवं गैलेक्टोज में परिवर्तित करता है।
इनवर्टेज — शेष स्टार्च का पाचन करता है।
सुक्रेस — यह सुक्रोज को ग्लुकोज एवं फ्रक्टोज में परिवर्तित करता है।
लाइपेज — यह इमल्सीकृत वसाओं को ग्लिसरीन एवं फैटी एसिड्स में परिवर्तित करता है।
बड़ी आँत
तीन भागों में विभाजित होती है। ① अग्रभाग – सीकम ② मध्य भाग – कोलन ③ अंतिम भाग – मलाशय (रेक्टम)
अवशोषण
छोटी आँत तक भोजन का पूर्ण पाचन हो जाता है, अर्थात् भोज्य पदार्थ यहाँ इस रूप में परिवर्तित हो जाता है कि आहारनाल की दीवारें उसे अवशोषण कर सकें। काईम (सरल भोज्य पदार्थ) के अवशोषण की मुख्य क्रिया छोटी आँत में उपस्थित माइक्रोविलाई या विलाई के द्वारा पूर्ण होती है। छोटी आँत में उपस्थित रसांकुर की काइम में उपस्थित सरल भोज्य पदार्थ जैसे — ग्लुकोज, एमीनो एसिड या वसीय अम्ल को अवशोषित करने के पश्चात रूधिर या लसीका में पहुँचाता है।
ऑनलाइन टेस्ट परीक्षा
कुल प्रश्न : 25
प्रत्येक प्रश्न के लिए 40 सेकंड
Leave a Reply