रक्त (Blood)

रक्त की परिभाषा

रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है, जो हमारे शरीर में निरंतर बहता रहता है और ऑक्सीजन, पोषक तत्व, हार्मोन तथा अन्य आवश्यक पदार्थों को शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचाता है तथा अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में सहायक करता है।

उपनाम

रक्त को शरीर का आंतरिक पर्यावरण का आधार स्तम्भ या जीवन का सर या जीवन का पेट्रोल भी कहा जाता है। रक्त का एक घटक WBC को सुरक्षात्मक कार्य करने के कारण इसे शरीर का पुलिसमैन भी कहा जाता है। रक्त 7.4 pHमान के साथ क्षारीय प्रकृति का होता है।

हिमेटोलॉजी

जीव विज्ञान की जिस शाखा में रक्त का अध्ययन किया जाता है, उसे हिमेटोलॉजी कहा जाता है, जबकि रक्त संबंधी अध्ययनों का विश्लेषण या अध्ययनकर्ता हीमेटोलॉजिस्ट कहलाता है।

उत्तक

रक्त एक उत्तक है जो रक्त कोशिकाओं से बना होता है।

रक्त = इरिथ्रोसाइट्स + लाइकोसाइट्स + थ्रोम्बोसाइट्स

शरीर का सबसे मुलायम उत्तक रक्त कहलाता है।

सरल संयोजी ऊतक

रक्त के चार प्रकार के ऊतक वर्गीकरण में संयोजी ऊतक की श्रेणी क्रम में आता है। वास्तव में रक्त एक प्रकार का तरल संयोजी ऊतक है। रक्त का द्रव स्वरूप या तरलता हिपेरिन नामक प्रोटीन के कारण होती है जिसका निर्माण शरीर की सबसे बड़ी एवं व्यस्ततम रसायन फैक्ट्री लीवर में होती है।

बफर विलयन

रक्त एक प्राकृतिक बफर विलयन है जिसका PH 7.4 अर्थात हल्का क्षारीय होता है।

कोलाइडी विलयन

रक्त एक प्राकृतिक कोलाइडी विलयन है।

असत्य ऊतक

रक्त एक प्रकार का असत्य ऊतक है क्योंकि संगठक रक्त कोशिकाएं विभाजन नहीं करती हैं।

हिमोपोईसिस

रक्त निर्माण की प्रक्रिया हिमोपोईसिस कहलाती है। स्तनधारियों के कंकाल तंत्र की हड्डियों के अस्थिमज्जा द्रव में से रक्त कोशिकाओं के निर्माण की प्रक्रिया हीमोपाइसिस कहलाती है।अस्थिमज्जा दो प्रकार का होता है—

लाल अस्थिमज्जा

लाल अस्थिमज्जा नामक द्रव से लाल रक्त कणिकाओं (RBC) एवं प्लेटलेट का निर्माण होता है।

पीला अस्थि मज्जा

पीला अस्थि मज्जा में श्वेत रक्त कीणकाओं (WBC) का निर्माण होता है।

पोटैशियम खनिज

अम्लीयता या क्षारीयता का प्रभाव रक्त में उपस्थित पोटैशियम खनिज के कारण नही पड़ता है।

लाल रंग

रक्त का लाल रंग RBC रक्त कोशिका / हीमोग्लोबिन यौगिक / हीम रंग वर्णक के कारण होता है।

धमनी

रक्त वहनी धमनी में शुद्ध रक्त (रक्त ऑक्सीजन) का परिवहन होता है।

शिरा

रक्त वाहनी शिरा में अशुद्ध रक्त (कार्बन डाइऑक्साइड) का परिवहन होता है इसकी pH 5.5 अर्थात अम्लीय प्रकृति का होता है।

हीमोपोयैटिक एवं हिमोलाइटिक

रक्त निर्माणक अंगों को हीमोपोयैटिक अंग एवं रक्त के विनाशी अंगों को हीमोलाइटिक अंग कहा जाता है।

रक्त का वर्गीकरण

रक्त एक तरल संयोजी ऊतक एवं कोलाइडी विलयन साथ ही बफर विलयन भी है जो कि दो भागों से मिल कर बना होता है:-क्या आप इन नोट्स के आधार पर कोई समरी, प्रश्न-उत्तर या स्टडी गाइड बनवाना चाहते हैं?

प्लाज्मा

रक्त का 60% जलीय भाग प्लाज्मा कहलाता है।

रक्त कणिकाएं

रक्त का 40% ठोस भाग रुधिराणु के रूप में होता है।

संगठन

रक्त प्लाज्मा में अकार्बनिक पदार्थ के रूप में 90% भाग जल एवं कार्बनिक पदार्थ के रूप में 7-8 प्रतिशत तथा 2-3% एंटीबॉडी या प्रतिपिण्ड पाई जाती है।

प्रोटीन

प्लाज्मा में मुख्य रूप से फाइब्रोनोजिन, ग्लोब्युलिन तथा एल्ब्युमिन प्रोटीन पाई जाती है।

ग्लोब्युलिन प्रोटीन

प्रतिरक्षा तंत्र के निर्माण में आवश्यक प्रोटीन ग्लोब्युलिन प्रोटीन कहलाती है।

एल्ब्युमिन प्रोटीन

सबसे छोटी घातक विषैली प्लाज्मा प्रोटीन एल्ब्युमिन कहलाती है।

फाइब्रोनोजिन प्रोटीन

रक्त का तरल अवस्था या द्रव अवस्था में बनाए रखने में लीवर में निर्मित इस प्रोटीन की आवश्यक भूमिका होती है।

हिपेरिन प्रोटीन

रक्त के तरल अवस्था या द्रव अवस्था में बनाए रखने में लीवर में निर्मित इस प्रोटीन की आवश्यक भूमिका होती है।

हिपैरिन

को प्राकृतिक थक्का रोधी पदार्थ या प्रोटीन / प्रतिस्कंदक पदार्थ भी कहा जाता है।

फाइब्रिनोजेन

फाइब्रिनोजेन को थक्का बनाने वाली प्रोटीन / स्कंदक पदार्थ भी कहा जाता है।

केंचुआ (पैरेटिमा पास्थुमा)

यह एनिलीडा संघ का जन्तु है।> हिमोग्लोबिन प्लाज्मा में घुला होता है।> रक्त का गाढ़ापन = रक्त प्लाज्मा + रक्त कणिका (RBC)> WBC एवं प्लेटलेट का कोई योगदान नही है।

महत्वपूर्ण तथ्य

1. कैथेबल बैंक में रक्त को 4°C तापमान पर सुरक्षित रखा जाता है।

2. ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने सर्वप्रथम कृत्रिम रक्त ऐप्लास्टिक रक्त तैयार किया था जो कि आपातकल में रक्त के रूप में एक अच्छा विकल्प है।

रक्त समूह

रक्त में उपस्थित एंटीजन और एंटीबॉडी के आधार पर निर्धारित होता है। सही रक्त समूह जानना रक्त चढ़ाने के लिए बहुत जरूरी है। रक्त समूह की खोज वर्ष 1900 में ऑस्ट्रिया के वैज्ञानिक Karl Landsteiner ने की थी।

एंटीजन

यह बाहरी या आंतरिक पदार्थ है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्तेजित कर एंटीबॉडी बनाने के लिए प्रेरित करता है।

एंटीबॉडी

ऐसे विशेष प्रोटीन होते हैं जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा किसी विदेशी एंटीजन के विरूद्ध बनाए जाते हैं। इन्हें इम्युनोग्लोब्युलिन भी कहा जाता है। एंटीबॉडी शरीर के “सुरक्षा सैनिक” हैं, जो हानिकारक जीवाणु वायरस को पहचान कर उन्हें नष्ट करने में मदद करता है।

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