आवर्त वर्गीकरण (periodic classification of element)

प्रारंभिक वर्गीकरण

एंटोनी लैवाशियर ने 1789 में लगभग 33 तत्वों को धातु और अधातु में वर्गीकृत किया जो कि पहला वैज्ञानिक प्रयास था, लेकिन बहुत सरल और सिमित था।

डोबेराइनर की त्रिक व्यवस्था (1829)

डोबेराइनर ने देखा कि कुछ तत्वों को तीन-तीन के समूह में रखा जा सकता है, जिनके

① रासायनिक गुण समान होते हैं।

② भौतिक गुणों में क्रमिक परिवर्तन होता है।

③ मध्य तत्व का परमाणु भार = पहले और तीसरे तत्व के परमाणु भार का औसत होता है।

Ex – Li, Na, K

समस्या – ① केवल कुछ ही तत्वों को त्रिक में रखा जा सका।② सभी ज्ञात तत्वों पर लागु नही।③ व्यापक आवर्त सरणी नही बना सके यह व्यवस्था सभी तत्वों पर लागु नही हो सके। अर्थात असफल रहा।

न्यूलैंड्स का अष्टक नियम (1864)

John Newlands ने 1864 में तत्वों के वर्गीकरण का एक महत्वपूर्ण प्रयास किया, जिसे अष्टक नियम कहा जाता है। यह मेंडलीफ़ से पहले का एक प्रमुख चरण था। उस समय लगभग 56-62 तत्व ज्ञात थे (H, Th)। परमाणु क्रमांक की खोज नहीं हुई थी, इसलिए तत्वों को परमाणु भार के आधार पर व्यवस्थित किया जाता था। न्यूलैंड्स ने तत्वों को बढ़ते परमाणु भार के क्रम में सजाया।

अष्टक नियम क्या कहता है?

“यदि तत्वों को बढ़ते परमाणु भार के क्रम में रखा जाए, तो हर आठवां तत्व पहले तत्व के समान गुण प्रदर्शित करता है।”न्यूलैंड्स ने इसकी तुलना संगीत के सप्तक से की—उन्होंने तत्वों को पंक्तियों में इस प्रकार व्यवस्थित किया—

यहाँ –

{Li} और {Na} के गुण समान

{Be} और {Mg} के गुण समान

{F} और {Cl} के गुण समान

उपलब्धियां

1. पहली बार तत्वों में नियमित आवृत्ति दर्शाई। 2. आवर्तिता की अवधारणा स्पष्ट की। 3. रसायन विज्ञान को गणितीय / तार्किक दिशा दी। 4. बाद के वैज्ञानिकों (विशेषकर मेंडलीफ़) को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि हर आठवें तत्व के गुण पहले तत्व जैसे होते हैं।

समस्या

यह नियम केवल हल्के तत्वों पर लागू हुआ।

मैंडलीफ की आवर्त सारणी (1869)

Dmitri Mendeleev ने 1869 में पहली वैज्ञानिक और व्यवस्थित आवर्त सारणी प्रस्तुत की। उस समय लगभग 63 तत्व ज्ञात थे। परमाणु क्रमांक की खोज नहीं हुई थी। तत्वों को परमाणु भार के आधार पर व्यवस्थित किया जाता था। मैंडलीफ ने उपलब्ध सभी तत्वों के गुण, संयोजकता, और उनके ऑक्साइड व हाइड्राइड के सूत्रों का गहन अध्ययन किया।

मैंडलीफ का आवर्त नियम

“तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुण उनके परमाणु भार के आवर्ती फलन हैं।”अर्थात, यदि तत्वों को बढ़ते परमाणु भार के अनुसार सजाया जाए, तो समान गुण निश्चित अंतराल पर दोहराते हैं।

सारणी की संरचना

8 समूह (I से VIII), प्रत्येक समूह को A और B उपसमूह में बांटा गया, समान रासायनिक गुण वाले तत्व एक ही स्तंभ में।

मेंडलीफ की विशेष रणनीति

उन्होंने कुछ तत्वों के परमाणु भार को गलत मानते हुए संशोधित किया

उदाहरण – टेल्लुरियम {Te} और आयोडीन (I) उन्होंने गुणों के आधार पर {I} को {Te} के बाद रखा, भले ही उनका परमाणु कम था।

अज्ञात तत्वों के लिए खाली स्थान

उदाहरण :

{Eka-Silicon} – बाद में जर्मेनियम

{Eka-Aluminium} — गैलियम,

{Eka-boron} — स्कैंडियम

उनकी भविष्यवाणी लगभग सही सिद्ध हुई।

★ कमियां —समस्थानिक को स्थान नहीं दे पाया & Atomic नम्बर नहीं दे पाया।

आधुनिक आवर्त सारणी (1913)

आधुनिक आवर्त सारणी 1913 में Henry Moseley के कार्य पर आधारित है। उन्होंने X-Ray स्पेक्ट्रा के अध्ययन से सिद्ध किया कि तत्वों के गुण परमाणु क्रमांक पर निर्भर करता है, न कि परमाणु भार पर।आधुनिक आवर्त सारणी में कुल 118 तत्व हैं जिसमें 90 प्राकृतिक तथा 28 कृत्रिम जो कि 7 आवर्त के साथ 18 वर्ग में व्यवस्थित किया गया।

आधुनिक आवर्त नियम

“तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांक के आवर्ती फलन होते हैं।”

परमाणु क्रमांक = प्रोटॉनों की संख्या (p^+)तटस्थ परमाणु = इलेक्ट्रॉनों की संख्या (e^-)इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ही रासायनिक गुणों का मूल कारण है इसलिए जैसे-जैसे Z बढ़ता है, इलेक्ट्रॉनिक विन्यास दोहराता है – गुणों में आवृति दिखती है।

ब्लॉक अवधारणा

आधुनिक सारणी इलेक्ट्रॉन के अंतिम भरे जाने वाले ऑर्बिटल पर आधारित है:

| ब्लॉक | | अंतिम इलेक्ट्रॉन |

| s-Block | 13 | NS |

| p-Block | 37 | NP |

| d-Block | 40 | (n-1) d |

| f-Block | 28 | (n-2) f |

इलेक्ट्रॉनिक विन्यास का गहरा आधार

आधुनिक सारणी निम्न सिद्धांतों पर आधारित है:

① Aufbau principle② pauli exclusion principle

Hund’s Rule

इलेक्ट्रॉन ऊर्जा के बढ़ते क्रम में भरते हैं:—

1s < 2s < 2p < 3s < 3p < 4s < 3d < 4p

{Na } (11) – 1s^2, 2s^2, 2p^6, 3s^1 = [↑↓] [↑↓] [↑↓][↑↓][↑↓] [↑]

प्रभावी नाभिकीय आवेश

आवर्त में दाएं जाने {Li} -{Be}-{B}-{C} -{N} -{O} -{F}

① Z बढ़ता है ② शिल्डिंग लगभग स्थिर ③ Zeff}बढ़ता है

परमाणु त्रिज्या

किसी परमाणु के केन्द्र से उसके सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन की दूरी को कहते हैं। इसे सरल शब्दों में कहा जाए तो यह परमाणु का आकार है।

① आवर्त में -> घटती है ② समूह में बढ़ती है (नई ऊर्जा स्तर जुड़ने से)

आयनीकरण ऊर्जा

किसी परमाणु या आयन से सबसे बाहरी e^- को निकालने में आवश्यक ऊर्जा को कहते हैं।

① आवर्त में बढ़ती ② समूह घटती

अपवाद— {Be} > {B}, {N} > {O} (अर्ध-भरे ऑर्बिटल की स्थिरता)

विद्युत ऋणात्मकता

किसी परमाणु की किसी रासायनिक बंध में इलेक्ट्रॉन को अपनी ओर खींचने की क्षमता को कहते हैं।

① आवर्त बढ़ती② समूह घटती③ सबसे अधिक फ्लोरीन

धात्विक एवं अधात्विक गुण

बाएं ओर धात्विक गुण अधिक

* दाएं ओर अधात्विक गुण अधिक

* जिग जैग रेखा उपधातु

परमाणु का आकार

किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु का आकार घटता है।

आयनन विभव

किसी परमाणु से इलेक्ट्रॉन को अलग करने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा को आयनन विभव कहा जाता है। सर्वाधिक आयनन विभव हीलियम का है और निम्नतम आयनन विभव तत्व सीजियम है।

S-ब्लॉक तत्व

s-ब्लॉक तत्व वे तत्व हैं जिनके सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन s-ऑर्बिटल में स्थित होते हैं।

इलेक्ट्रॉन विन्यास – ns^1 या ns^2

समूह 1 – ns^1 क्षारीय धातु

समूह 2 – ns^2 क्षारीय पृथ्वी धातु

अधातु

ऑक्सीजन (O), N, Halogens, F, Cl.धातु – Al, Ga, In. उपधातु – B, Si, Geधातु, अधातु और उपधातु का मिश्रण p- ब्लॉक में तीनों प्रकार के तत्व होते हैं।

धातु

रासायनिक गुणों में विविधता – इन तत्वों के गुण एक दूसरे से बहुत भिन्न होते हैं।

d-ब्लॉक

d-ब्लॉक में वे तत्व होते हैं जिनमें d-आर्बिटल में इलेक्ट्रॉन होते हैं।

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